‘Why I killed Gandhi’ फिल्म पर रोक की मांग पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इंकार

नई दिल्ली / मुंबई (TBN – अनुभव सिन्हा की रिपोर्ट)| महात्मा गांधी की हत्या पर बनी एक फिल्म “Why I killed Gandhi”, OTT प्लेटफार्म पर 30 जनवरी को रिलीज होने के पहले उसके प्रदर्शन पर रोक लगाने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार कर दिया.

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत एक याचिका पर विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि फिल्म की रिलीज के कारण याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं हुआ है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया हालांकि, याचिकाकर्ता संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए स्वतंत्र होगा.

यहां याचिकाकर्ता की जल्दबाजी गौर करने लायक है. गांधी की छवि को धूमिल होने से बचाने का उपाय उन्हें Article 32 में नजर आया और बिना कुछ विचारे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का रास्ता तो दिखाया ही, इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि याचिकाकर्ता ने महज अपने संदेहों को दूर करने के लिए कानूनी सुरक्षा को जरूरी समझा, न कि कानून की बारीकियों की कसौटी पर उसे कसने की कोशिश की.

हालांकि याचिकाकर्ता के सामने हाईकोर्ट जाने का विकल्प है और हाईकोर्ट फिल्म प्रदर्शन पर रोक संबंधी याचिका पर क्या स्टैण्ड लेता है, यह हाईकोर्ट पर निर्भर है, लेकिन फिल्म की संवेदनशीलता का हौवा खड़ा करना और भारतीय मानस की समझ पर संदेह करना, यह स्वीकार किया जा सकता है ?

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Why I killed Gandhi 2017 में बनी थी. 45 मिनट की इस फिल्म को तब सेंसर बोर्ड ने रिलीज के लिए अपनी स्वीकृति नहीं दी थी. समय बीतने के साथ खासकर कोविड महामारी को देखते हुए लाकडाउन की अवधि में फिल्म और मनोरंजन सामग्रियों के प्रदर्शन के लिहाज से OTT प्लेटफार्म आगे आए जिसने सिनेमाघरों के बंद रहने की कमी को पूरा किया. एक खास बात यह भी है कि OTT प्लेटफार्म पर किसी फिल्म या वेब सीरीज के प्रदर्शन को सेंसर करने के लिए कोई रेग्यूलेटरी नहीं है.

इसी वजह से याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रूख किया था जहां उसकी याचिका को सुनवाई के योग्य नहीं मानते हुए उसे हाईकोर्ट का रूख करने का रास्ता बताया गया. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जे. के. माहेश्वरी की खण्डपीठ के समक्ष यह याचिका सुनवाई के लिए आई थी.

याचिका में कहा गया था कि फिल्म को सेंसर बोर्ड की तरफ से मंजूरी नहीं मिली है, जिसके बावजूद इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जा रहा है.

याचिकाकर्ता ने आशंका जगाई थी कि फिल्म के रिलीज होने पर देश भर मे अशांति पैदा हो सकती है. साथ ही इस फिल्म में नाथूराम गोड्से का महिमामण्डन है तो दूसरी तरफ गांधी की छवि को धूमिल करने की कोशिश है. गांधी की हत्या को देश विभाजन से जोड़कर उसे सही ठहराने की कोशिश की गई है.