हौसलों से भरे गीत का सृजन

क्या होता है जब सपनों की खूबसूरती कल्पनाओं के रंग से चटकने लगे…….!!! कुछ अच्छा हो जाता है…..कुछ इतना ही अच्छा कि लोगों की पसंद बनकर उनकी जुबान पर आ जाय.

और यही हुआ……होना ही था, क्योंकि ढेर सारे मौलिक और सुंदर प्रतिभाओं का सामूहिक योगदान तब ज्यादा सार्थक होकर सामने आता है जब वह देश-काल की परिस्थितियों से जुड़ जाय.

लॉकडाउन भारतवासियों के लिए बिल्कुल नया अनुभव. एक साथ चार-चार पीढ़ियां इस अनुभव से गुजर रही थीं. ऐसे में कोमल मन को कुलांचे तो भरना ही था.

विवेक अस्थाना भी आमलोगों की तरह कोरोना के कारण लॉकडाउन में गोरेगांव स्थित अपने आवास की चारदीवारी में कैद थे. लॉकडाउन के समय लोगों के धैर्य और हौसले ने उनकी कल्पनाओं को झकझोरा तब “हौसलों की जीत” जैसा गीत उड़ान भरने लगा. गीत तैयार…..तब धुन भी बन गयी. लेकिन उत्साह तब बढ़ा जब पांच साल की बिटिया इसे गुनगुनाने लगी. लेकिन अब सामने सिर्फ समस्याएं थीं. रिकॉर्डिंग की समस्या, गायक की समस्या, ट्रैक की समस्या आदि…आदि. स्नेही सुनाम पाणिग्राही ने सहयोग का आश्वासन दिया.

उन्होंने कोलकाता के प्रमुख रिकॉर्डिंग स्टूडियो फ्यूजन प्रो के मालिक और साउंड इंजीनियर देव प्रसाद की सहमति ले ली. फिर पटना के गायक नितेश रमण, अहमदाबाद के बंदिश वाज़, बॉलीवुड की चर्चित गायिका पामेला जैन, मुम्बई की ही खुशबू जैन, एडमोंटन (कनाडा) की उभरती गायिका रश्मि सिंह, इन सबों ने अपनी सहमति दे दी. रिकॉर्डिंग के लिए अब तक ट्रैक भी तैयार हो चुका था. गाते हुए सभी गायक/गायिकाओं का वीडियो जब आ गया तब मिक्सिंग के लिए उसे देव प्रसाद जी के पास कोलकाता भेज गया.

वीडियो सम्पादन के लिए दिल्ली के वीडियो एडिटर अक्षत सिंह का अप्रतिम सहयोग मिला.

इतनी कवायद के बाद लॉकडाउन की चुनौतियों से भरे माहौल में एक अनूठा गीत बनकर तैयार हो गया. आनंद उठाने के लिए अब यह गीत उपलब्ध है सियोना एंटरटेनमेंट (Siyona Entertainment) के यूट्यूब चैनल पर. विवेक अस्थाना इस कर्णप्रिय गीत की लोकप्रियता से पुलकित हैं.

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