‘चाचा चौधरी’ बने “नमामि गंगे कार्यक्रम” के शुभंकर

नई दिल्ली (TBN – The Bihar Now डेस्क)| प्रसिद्ध भारतीय हास्य पुस्तक चरित्र चाचा चौधरी (Chacha Chaudhary) को शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (National Mission for Clean Ganga) की कार्यकारी समिति की बैठक में केंद्र सरकार के ‘नमामि गंगे कार्यक्रम’ (Namami Gange Programme) का शुभंकर घोषित किया गया है. NMCG ने कार्टून चरित्र वाले कॉमिक्स, ई-कॉमिक्स और एनिमेटेड वीडियो के विकास और वितरण के लिए डायमंड टून्स के साथ करार किया है.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के लिए करार की गई कुल अनुमानित बजट 2.26 करोड़ रुपये है. कॉमिक्स को शुरुआत में हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली भाषाओं में लॉन्च किया जाएगा.

जल शक्ति मंत्रालय (Ministry of Jal Shakti) के अनुसार चाचा चौधरी को शुभंकर बनाने का निर्णय गंगा और अन्य नदियों के प्रति बच्चों के व्यवहार में बदलाव लाने के एनएमसीजी (NMCG) के प्रयास का हिस्सा है.

मंत्रालय ने कहा कि युवा “परिवर्तन के प्रेरक” हैं, जिससे एनएमसीजी ने अपने आउटरीच और सार्वजनिक संचार प्रयासों में उन पर ध्यान केंद्रित किया है. बता दें, नमामि गंगे परियोजना को प्रदूषण के प्रभावी उन्मूलन और राष्ट्रीय नदी गंगा के संरक्षण और कायाकल्प के लिए केंद्र सरकार के एक प्रमुख कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया था.

यह भी पढ़ें | वन्‍यप्राणी सप्‍ताह शुरू, नहीं लगेगा प्रवेश शुल्‍क पटना चिड़‍ियाघर में

एनएमसीजी के महानिदेशक राजीव रंजन मिश्रा (Rajiv Ranjan Mishra, DG, NMCG) ने एक बयान में कहा कि एनएमसीजी हमेशा युवाओं और बच्चों पर विशेष ध्यान देने के साथ सामुदायिक जुड़ाव में रहा है. डायमंड टून्स के साथ यह करार इस दिशा में एक और प्रभावी कदम होगा.

बैठक के दौरान, बिहार में गंगा के बाढ़ के मैदानों के आर्द्रभूमि (Gangetic floodplain wetlands) के संरक्षण और स्थायी प्रबंधन का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया. वेटलैंड इन्वेंट्री और मूल्यांकन, वेटलैंड मैनेजमेंट प्लानिंग, वेटलैंड की निगरानी, ​​और क्षमता विकास और आउटरीच लगभग ₹ 2.50 करोड़ की अनुमानित लागत के साथ परियोजना के प्रमुख घटक होंगे.

मंत्रालय ने कहा, “प्रस्ताव का उद्देश्य बिहार के 12 गंगा जिलों में बाढ़ के मैदानों के प्रभावी प्रबंधन के लिए ज्ञान का आधार और क्षमता बनाना है ताकि आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के निरंतर प्रावधान और जैव विविधता आवासों को सुरक्षित किया जा सके.”