आज रक्षाबंधन को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क) | रक्षा बंधन हिन्दूओं तथा जैनों का त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है. यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक है – ‘रक्षा’ का मतलब ‘सुरक्षा’ और ‘बंधन’ का मतलब ‘बाध्य’ है. इस दिन राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व होता है.

इस दिन बहनें ईश्वर से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं. सामान्यतया बहन भाई को ही राखी बाँधती हैं, लेकिन ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है.

आजकल प्रकृति को संरक्षित करने के उद्देश्य से पेड़-पौधों को राखी बाँधने की परम्परा भी शुरू हो गयी है. ब्राह्मणों द्वारा रक्षासूत्र बांधा जाता है तथा इसे बांधते व्यक्त उनके द्वारा निम्न श्लोक पढ़ा जाता है जिसे, भविष्यपुराण के अनुसार, इन्द्राणी द्वारा निर्मित रक्षासूत्र को देवगुरु बृहस्पति ने इन्द्र के हाथों बांधते समय पढ़ा गया था –

येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल ॥

(हिन्दी शब्दार्थ – “जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बाँधा गया था, उसी सूत्र से मैं तुझे बाँधता हूँ। हे रक्षे (राखी)! तुम अडिग रहना (तू अपने संकल्प से कभी भी विचलित न हो।)

इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 3 अगस्त सोमवार को मनाया जाएगा. वैसे तो रक्षा बंधन के दिन पूरे दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बांधती हैं, परंतु शुभ मुहूर्त में बांधना काफी फलदायी होता है. आइए जानते हैं आज रक्षाबंधन के दिन का शुभ मुहूर्त –

रक्षा बन्धन अनुष्ठान का समय – 09:28 सुबह से 08:43 रात्री (अवधि – 11 घण्टे 15 मिनट्स)
रक्षा बन्धन के लिये अपराह्न का मुहूर्त – 01:15 दोपहर से 03:54 शाम (अवधि – 02 घण्टे 39 मिनट्स)
रक्षा बन्धन के लिये प्रदोष काल का मुहूर्त – 06:34 शाम से 08:43 रात्री (अवधि – 02 घण्टे 09 मिनट्स)
रक्षा बन्धन भद्रा अन्त समय – 09:28 सुबह
रक्षा बन्धन भद्रा पूँछ – 05:16 सुबह से 06:28 सुबह
रक्षा बन्धन भद्रा मुख – 06:28 सुबह से 08:28 सुबह
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – अगस्त 02, 2020 को 09:28 रात्री बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त – अगस्त 03, 2020 को 09:28 रात्री बजे

बता दें कि अपराह्न (दोपहर के बाद) का समय रक्षा बन्धन के लिये अधिक उपयुक्त माना जाता है. लेकिन यदि अपराह्न का समय भद्रा आदि की वजह से उपयुक्त नहीं है तो प्रदोष काल का समय भी रक्षा बन्धन के संस्कार के लिये उपयुक्त माना जाता है.

भद्रा का समय रक्षा बन्धन के लिये निषिद्ध माना जाता है तथा हिन्दु मान्यताओं के अनुसार कोई भी शुभ कार्य भद्रा में नहीं किया जाना चाहिये. भारतीय हिन्दु ग्रंथों और पुराणों में भद्रा समाप्त होने के बाद रक्षा बन्धन मनाने की सलाह दी गई है.

भद्रा पूर्णिमा तिथि के पूर्व-अर्ध भाग में व्याप्त रहती है, इसलिए भद्रा समाप्त होने के बाद ही रक्षा बन्धन किया जाना चाहिये. उत्तर भारत में ज्यादातर परिवारों में सुबह के समय रक्षा बन्धन किया जाता है जो कि भद्रा व्याप्त होने के कारण अशुभ समय भी हो सकता है. इसीलिये जब प्रातःकाल भद्रा व्याप्त हो तब भद्रा समाप्त होने तक रक्षा बन्धन नहीं किया जाना चाहिये.

कुछ लोगो का ऐसा मानना है कि प्रातःकाल में, भद्रा मुख को त्याग कर, भद्रा पूँछ के दौरान रक्षा बन्धन किया जा सकता है लेकिन भद्रा के दौरान किसी भी रक्षा बन्धन मुहूर्त को मानना सही नहीं है.

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