जलवायु पर‍िवर्तन के कारण 2030 तक 9 करोड़ भारतीयों पर भुखमरी का खतरा – रिपोर्ट

नई दिल्ली (TBN – The Bihar Now डेस्क)|जलवायु परिवर्तन (Climate change) का कहर आने वाले सालों में और ज्यादा बढ़ने वाला है, जिस कारण भारत की नौ करोड़ से ज्यादा आबादी पर भुखमरी का खतरा मंडरा रहा है. इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (International Food Policy Research Institute) ने अपनी रिपोर्ट में यह चेतावनी दी है.

“द ग्लोबल फूड पॉलिसी रिपोर्ट 2022” (The Global Food Policy Report 2022) में कहा गया कि 2030 तक नौ करोड़ भारतीयों को भुखमरी का सामना करना पड़ेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले वाले 70-80 सालों में फसलों की पैदावर में काफी कमी आएगी और हीट वेव एवं गर्मी का स्तर (Heat wave and heat level) भी कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगा.

रिपोर्ट में आगाह किया गया कि भारत में जलवायु परिवर्तन के कारण 2030 तक नौ करोड़ से ज्यादा लोग भूखमरी का सामना करेंगे. सामान्य परिस्थितियों में यह आंकड़ा 7.39 करोड़ होता, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण भुखमरी का सामना करने वाले लोगों की संख्या में 23 फीसद की बढ़ोतरी हो जाएगी.

2030 तक औसत कैलोरी खपत में मामूली गिरावट की संभावना है. रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य परिस्थितियों में 2,697 किलो कैलोरी प्रति व्यक्ति/दिन से जलवायु परिवर्तन के कारण 2,651 किलो कैलोरी प्रति व्यक्ति/दिन तक कमी आएगी.

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अगर जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखा जाए तो अनाज, मांस, फलों, सब्जियों, तिलहन, दालों, जड़ों और कंदों के वजन के आधार पर भारत का कुल खाद्य उत्पादन सामान्य परिस्थितियों में 1.627 से घटकर 1.549 हो सकता है.

रिपोर्ट मे कहा गया कि 2100 तक देश का औसत तापमान 2.4 डिग्री सेल्सियस और 4.4 डिग्री सेल्सियस के बीच बढ़ने का अनुमान है। वहीं, हीट वेव भी तिगुनी या चौगुनी होने की आशंका जताई गई है.

औसत तापमान में वृद्धि की वजह से फसलों की पैदावार पर असर पड़ेगा. रिपोर्ट में कहा गया कि जलवायु परिवर्तन के कारण 2041-2060 तक पैदावार 1.8 से 6.6 प्रतिशत और 2061-2080 तक 7.2 से 23.6 प्रतिशत तक गिर सकती है. रिपोर्ट में ग्रीनहाउस उत्सर्जन को कम करने के लिए पानी की कमी वाले उत्तर-पश्चिम और प्रायद्वीपीय भारत में चावल के बजाय दूसरी फसलों की पैदावार बढ़ाने का सुझाव दिया गया है. इसमें कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा को खतरे में डाले बिना इन क्षेत्रों में चावल की पैदावार वाले इलाकों को कम किया जा सकता है.

(इनपुट-एजेंसी)