इस दीपावली फैलेगी रिमांड होम के बच्चों के हाथों से बनी ‘नटखट अगरबत्ती’ की सुगंध

बिहारशरीफ (TBN – The Bihar Now डेस्क)| नालंदा (Nalanda) के पर्यवेक्षण गृह (Nalanda Remand Home) में रह रहे बच्चों के द्वारा बनाए गए अगरबत्ती से इस बार लोगों के घरों में दीपावली की खुशबू महकेगी. और इस पहल का श्रेय जाता है बच्चों व किशोरों के अनोखे फैसलों से चर्चित रहने वाले किशोर न्याय परिषद (Juvenile Justice Council) के प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र (Manvendra Mishra CJM) को.

प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र की पहल से इस पर्यवेक्षण गृह में अगरबत्ती बनाने की मशीन लगी है. संभवत: यह किसी भी पर्यवेक्षण गृह में लगने वाली बिहार की पहली तथा संभवतः देश की भी पहली अगरबत्ती बनाने की मशीन है. इस मशीन के लगने से यहां के हुनरमंद बच्चे अगरबत्ती बनाएंगे जिसे ‘नटखट अगरबत्ती’ (Natkhat Agarbatti) का नाम दिया गया है.

रविवार को प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र यहां पहुंचें. उन्होंने वहां इस मशीन पर हो रहे निर्माण गतिविधियों का जायजा लिया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि कौशल विकास के तहत हमारा उद्देश्य है कि यहां रहने वाले बच्चे उन सब चीजों का भी प्रशिक्षण ले जिससे वे तो आत्मनिर्भर बन ही सकते है. साथ-साथ उनसे जुड़कर और लोग भी रोजगार को प्राप्त कर सकें.

बता दें, इस मशीन को लगाने के लिए बिहारशरीफ के नईसराय मोहल्ला के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार ने 1 लाख रु का आर्थिक मदद किया है. वहीं शिक्षक अविनाश गिरी ने यहां बनने वाली अगरबत्तियों की पैकेजिंग के लिए मशीन दी है. मार्केटिंग से लेकर अन्य तरह की सहायता आइएनएटीएसजी (INATSG), पटना के संचालक राकेश कुमार द्वारा किया जाएगा.

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इस पर्यवेक्षण गृह में रह रहे 70 बच्चों में से 10 बच्चे इस मशीन से ‘नटखट अगरबत्ती’ बनाएंगे. इसके लिए उन सबों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है. आपको बता दें, पिछले साल यहां के बच्चों ने दीपावली में मोमबती बनाया था जो इस साल भी बन रहे हैं.

प्रधान दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र

वैसे तो 70 में से 10 बच्चों को प्रशिक्षित किया गया है लेकिन जो भी बच्चे प्रशिक्षण लेना चाहते हैं, उन्हें भी प्रशिक्षित किया जाएगा. साथ ही आज रविवार से इस पर्यवेक्षण गृह में डिजिटल लर्निग सिस्टम ई क्लास की भी शुरुआत की गई. अगर इन बच्चों को कोई शिक्षक पढ़ाना चाहेगें, तो ई-क्लास के माध्यम से वे कहीं से इस सिस्टम से जुड़ कर बच्चों को पढ़ा सकेगें.

रविवार को प्रधान दंडाधिकारी के इस पर्यवेक्षण गृह पहुँचने पर उनके साथ यहां के प्रभारी पंकज कुमार, राकेश कुमार, डॉ सुनील कुमार, अविनाश गिरी मौजूद थे.