यथार्थ के साथ मानवीय संवेदना के सच को उकेरती है “नेम प्लेट”

आरा (TBN – आमोद कुमार की रिपोर्ट)| वरिष्ठ पत्रकार सह लेखक भीम सिंह भवेश की तीसरी पुस्तक “नेम प्लेट” कहानी संग्रह का विमोचन विद्या भवन स्थित सभागार में हुआ. अभिधा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक का सामूहिक लोकार्पण वरिष्ठ आलोचक सह कलाविद ज्योतिष जोशी, कथाकार अवधेश प्रीत, उप विकास आयुक्त हरि नारायण पासवान, संतोष दीक्षित, प्रो रवींद्र नाथ राय, परशुराम शर्मा, डॉ विजय लक्ष्मी शर्मा ने संयुक्त रूप से किया.

ज्योतिष जोशी ने कहा कि जब रचना अपनी विधा का अतिक्रमण करती है, तभी लेखन की कला मनुष्य में आती है. उन्होंने कहा कि कहानी संग्रह में कथा, संवेदना, सत्य, भविष्य और कटाक्ष सब कुछ मौजूद है. उन्होंने कहा कि आधुनिक दौर में कहानी की परिभाषा बदल रही है लेकिन फिर भी हम प्रेमचंद की परंपरा में ही चलते हैं. दरअसल कहानी जहां समाप्त होती है, उसकी समस्या वहीं से शुरु होती है. भवेश जी की कहानी यथार्थ, संवेदना और भाव से परिपूर्ण है, क्योंकि पत्रकार अपने समय की वेदना, सच्चाई और सत्य को कहानी का रूप दे रहा है ‘नेम प्लेट’ एक भाव प्रधान कहानी है.

अवधेश प्रीत ने कहा कि यह कहानी संग्रह पढ़कर ऐसा लग रहा है कि लेखक ने माननीय दृष्टि और संवेदना को एक ही धागे में पिरो कर कोई सुंदर-सी कलाकृति बनाया है. कहानियों को संवेदना के साथ लिखा गया है. इसमें यथार्थ को परखने की भरपूर कोशिश की गई है. कहानी संग्रह कथा रिपोर्ताज वाली शैली है, जो रेणु के जमाने में लिखी जाती थी.

वरिष्ठ कथाकार संतोष दीक्षित ने कहा कि भारत में कहानी की विधा 121 साल पुरानी है लेकिन इस कथा संग्रह में वह सारी चीजें देखने को मिल रही है, जो पत्रकारिता से लेखक बनने के बाद किसी कलम द्वारा लिखी जाती है.

डीडीसी हरिनारायण पासवान ने कहा कि पुस्तक का शीर्षक यानी नाम काफी रोचक है साथ ही इसकी कहानियां भी काफी मशहूर होंगी. किताब में जो चीजें लिखी गई हैं उसे अपने जीवन में उतारने की भी कोशिश जरूर करनी चाहिए.

विषय प्रवेश कराते हुए लेखक डाॅ भीम सिंह भावेश ने कहा कि यह मेरी तीसरी किताब है. ‘नेम प्लेट’ मूल रूप से विभिन्न कहानियों का संग्रह है. इसमें मैंने 9 कहानियों को लिखा है और सारी कहानियां समाज के साथ-साथ यथार्थ से जुड़ी हुई हैं.

चिकित्सक डॉ विजय लक्ष्मी शर्मा ने कहा कि बुद्धि और भाव को मिलाकर साहित्य की रचना की जाती है और लेखक ने अपने अनुभव और यथार्थ की आंच में पकाकर सभी कहानियों को परोसा है.

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अध्यक्षता करते हुए प्रो रवींद्रनाथ राय ने कहा कि भवेश ने अपनी पुस्तक में समाज और सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार को बड़े ही जीवंत तरीके से उकेरा है जिसे आप दस्तावेज के रूप में भी कह सकते हैं. सारी कहानियों को लेखक ने बड़ी ही कलात्मकता के साथ परोसा है. उन्होंने कहा कि डॉ भवेश में काफी संभावनाएं हैं.

इस अवसर पर प्रो रणविजय कुमार और प्रो दिवाकर पांडे ने भी अपने विचार रखे. मौके पर पूर्व एमएलसी डॉ अजय कुमार सिंह, मौर्य होटल के महाप्रबंधक बीडी सिंह, डॉ गांधीजी राय, डॉ केएन सिन्हा, प्रो पशुपति नाथ सिंह, जितेन्द्र कुमार, गुंजन सिन्हा, डॉ अर्चना सिंह, डॉ विभा कुमारी, पूर्व डीन डॉ केके सिंह, प्रो बलिराज ठाकुर, कवि अरुण शीतांश, अशोक शर्मा, लव कुमार सिंह, अवधेश चैधरी, सिद्धेश्वर उपाध्याय, सियाराम सिंह, देवेन्द्र प्रसाद, सहित कई बुद्धिजीवी थे.