नहीं मिला है 12 साल बाद भी जेपी सेनानियों को लाभ, सीएम और डिप्टी सीएम को दिया ज्ञापन

पटना (TBN – The Bihar Now की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट)| संपूर्ण क्रांति मंच, बिहार ने बिहार के मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्री से मांग की है कि राज्य सरकार द्वारा जेपी सेनानियों को जल्द से जल्द सम्मानित किया जाए. उन्होंने यह भी मांग की है कि राजधानी में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संस्कार स्थल को “लोकनायक घाट” के रूप में विकसित किया जाए.

संपूर्ण क्रांति मंच (Sampurna Kranti Manch), बिहार के अध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा (Sanjay Kumar Sinha) के नेतृत्व में मंगलवार को 11 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमण्डल मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन देकर यह मांग की है.

मंच ने मांग की है कि 2009 में बने नियमावली के अनुसार जेपी सेनानियों को जल्द से जल्द सम्मानित किया जाए, 1 दिन से अधिक अवधि तक अन्य धाराओं में बंदी जेपी सेनानियों को भी सम्मान योजना अंतर्गत लाया जाए, तथा पटना में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संस्कार स्थल को लोकनायक घाट के रूप में विकसित किया जाए.

12 साल बाद भी नहीं मिला लाभ

अपने ज्ञापन में प्रतिनिधिमण्डल द्वारा जेपी सेनानियों की समस्याओं के बारे में बताया गया है. प्रतिनिधिमण्डल ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं उप-मुख्यमंत्री का ध्यान 2009 में बनी नियमावली की कंडिका-2 एवं कंडिका-‘च’ की ओर आकृष्ट कराया गया है. ज्ञापन में कहा गया है कि नियमावली के बनने के लगभग 12 बाद भी अभी तक जेपी आंदोलन के दौरान भूमिगत आंदोलनकारियों एवं अन्य धाराओं में बंदी सेनानियों को प्रशस्ति पत्र एवं अन्य योजनाओं का लाभ नहीं मिला है.

संपूर्ण क्रांति मंच, बिहार के अध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने दी बिहार नाउ (The Bihar Now) से कहा कि 1974 के विशाल जन आंदोलन (JP Movement), जिसका नेतृत्व लोकनायक जयप्रकाश नारायण (Loknayak Jai Prakash Narayan) ने किया था, के आह्वान पर काफी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं युवकों ने इस आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी.

उन्होंने आगे कहा कि इस आंदोलन को सफल बनाने में बुद्धिजीवियों, कवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं सहित पत्रकारों आदि ने सक्रिय भूमिका निभाई थी. इतना ही नहीं, आपातकाल के दौरान बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं युवकों ने अपनी गिरफ्तारियां दी थी. उन्होंने कहा कि बहुत से युवक एवं युवतियां पुलिस की गोलियों एवं प्रताड़ना का शिकार भी हुए थे. बहुत से युवक भूमिगत रहकर भी जेपी आंदोलन की धार को कुंद नहीं होने दिया था.

सीएम का इस ओर आकृष्ट कराया ध्यान

मुख्यमंत्री को ज्ञापन के माध्यम से मंच ने सरकार का ध्यान उस ओर आकृष्ट कराने की कोशिश की है जिसमें, उस वक्त भी मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार (Nitish Kumar CM) ने 1974 के जेपी आंदोलन में शामिल लोगों की सूची लेकर जेपी सेनानियों को सम्मानित करने के लिए “जेपी सेनानी सम्मान पेंशन योजना” ( JP Senani Samman Pension Yojna) लागू की थी.

ज्ञापन में कहा गया है कि दुर्भाग्यवश अभी गृह (विशेष) विभाग, बिहार सरकार के जारी संकल्प के अंतर्गत वास्तविक भूमिगत आंदोलन आंदोलन कार्यों की मांग अभी तक अधूरी पड़ी है.

मंच ने ज्ञापन में लिखा है कि सरकार द्वारा नियमावली को शुरू किए लगभग 12 साल हो गए हैं. 1974 के आंदोलन के शामिल युवक आज वयोवृद्ध होकर उम्र के चौथे पड़ाव पर सरकार की ओर टकटकी लगाए अपने सम्मान की बाट जोह रहे हैं. कई सेनानी तो सम्मान की आस में दुनिया छोड़ चुके हैं.

उप-मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद (Tar Kishore Prasad Dy CM) से यह प्रतिनिधिमंडल मिलकर ज्ञापन सौंपा. उप-मुख्यमंत्री, जिन्होंने खुद जेपी आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी और इस आंदोलन में विद्यार्थी परिषद एवं इससे जुड़े संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी, ने प्रतिनिधिमण्डल को उनको मांगों पर तुरंत कार्यवाही का आश्वासन दिया.

प्रतिनिधिमण्डल ने उप-मुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद से आग्रह किया कि वे जेपी आंदोलन में भूमिका निभाने वाले तथा उस दौरान एक दिन से अधिक जेल में बंद किए गए जेपी सेनानियों को बिहार सरकार के गृह (विशेष) विभाग के संकल्प संख्या – एन./गृ0 को0-74-0052/2009 के अनुरूप सम्मानित करवाएं.

संपूर्ण क्रांति मंच के इस प्रतिनिधिमण्डल में श्यामल किशोर (भागलपुर), महेंद्र हाजरा (सहरसा), जयप्रकाश गौतम (मुंगेर), राजकुमार झा(सुपौल) , शोभा देवी ( लक्खीसराय), सुशीला देवी (नवादा), सचिदानंद मंडल (तारापुर), राजकुमार साहब(मधेपुरा), देवेंद्र साह(सहरसा), सहदेव मंडल ( मुंगेर) तथा सुरेश साव (कटिहार) शामिल थे.