कोरोना से बचाव के लिए इमारत-ए-शरिया की अपील

पटना (TBN रिपोर्ट) | एक ओर जहां कोरोना वायरस संक्रमण के संकट के बीच तबलीगी जमात के रवैए को लेकर देशभर में आलोचना हो रही है, वहीं बिहार, झारखंड और उड़ीसा के मुसलमानों की सबसे बड़ी एदारा, इमारत-ए-शरिया ने मुस्लिम समाज के लोगों से कोरोना को लेकर बचाव के लिए एक अपील जारी किया है.

इस अपील में इमारत-ए-शरिया ने कहा है कि समाज में जिन लोगों को कोरोना का संदेह है, वह अपनी जांच अवश्य कराएं लें. इस अपील की जानकारी देते हुए इमारत-ए-शरिया के कार्यवाहक नाजिम हजरत मौलाना शिबली अल कासमी ने कहा कि कोरोना वायरस दुनिया भर में तबाही मचा रहा है. इसका असर पूरे देश पर दिख रहा है. कोरोना यानि कोविड-19 की बीमारी में काफी एहतियात और दूरी बनाए रखने की जरूरत है. कोरोना की बीमारी एक आदमी से दूसरे आदमी तक तेजी से पहुंच कर बहुत ही जल्दी फैल जाती है. उन्होंने कहा कि इस वक्त डॉक्टरों की ओर से जो निर्देश दिए जा रहे हैं उसकी पूरी पाबंदी करनी चाहिए. और, देश की सरकार जिस तरह की सुरक्षा का बंदोबस्त कर रही है और जनता से करा रही है उस का साथ देना चाहिए. यह असल में अपनी मदद ही, अपने घर और परिवार की मदद है.
उन्होंने कहा है कि जिस आदमी को भी सूखी खांसी, बुखार, बदन में दर्द हो या फिर जिनके भी मोहल्ले में कोरोना वायरस पहुंच चुका हो, उन्हें खुद से अपनी जांच कराने के लिए जांच की जगह पर पहुंच जाएं. उन्होंने अपील की कि मुस्लिम समाज कोरोना की जांच में सहयोग करें क्योंकि इसे छुपाने से या इसकी जांच कराने से बचने में अपना ही नुकसान है. जांच के बाद ही तय हो पाएगा कि यह बीमारी है या नहीं. अगर नहीं है तो ठीक है. और अगर बीमारी है, तो उसका इलाज होगा और अल्लाह ताला बीमारी से शिफा देंगे. इससे घबराने और डरने की जरूरत नहीं है.
हजरत मौलाना शिबली अल कासमी ने आगे कहा कि हमारे वह भाई जो 13 मार्च या उसके आसपास मरकज हजरत निजामुद्दीन में थे, उन्हें चाहिए कि खुद से जांच की जगह पर पहुंचकर अपनी जांच कराएं और सब लोगों से अलग रहें. एहतियात के तौर पर ऐसा करना जरूरी है. तवक्कुल का यह मतलब नहीं कि एहतियात ना की जाए और जांच ना कराई जाए. इस बीमारी को छुपाने से अपना, अपने परिवार और पूरे समाज का नुकसान हो सकता है. उन्होंने कहा कि हजरत अमीर-ए-शरियत ने कहा है कि सरकार जिस तरह के सुरक्षा के बंदोबस्त कर रही है उसका साथ देना हम सबके लिए बेहद जरूरी है.