कोविड-19: सबसे अधिक जोखिम में A और AB ब्लड ग्रुप, O ग्रुप सबसे सुरक्षित

नई दिल्ली / पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क) | कोरोना वायरस (Covid-19) के बारे में शोधकर्ताओं ने पाया है कि यह महामारी कुछ के लिए घातक है तो दूसरों के लिए ऐसा नहीं है. नए शोध से पता चलता है कि A और AB ब्लड ग्रुप वाले लोग कोरोना संक्रमण के लिए सबसे अधिक असुरक्षित हैं, जबकि O ब्लड ग्रुप वालों को कोरोना वायरस के संक्रमण से सबसे कम खतरा होता है. इसका अध्ययन का प्रकाशन Blood Advances पत्रिका में किया गया है.

शोध में पाया गया कि O ग्रुप वाले लोगों में कोरोना वायरस के गंभीर लक्षणों के साथ अंगों की विफलता (organ failure) के जोखिम की संभावना कम होती है. इस प्रकार O ब्लड टाइप वाले लोगों में कोरोनावायरस के संक्रमण की संभावना कम होती है.

पहला शोध

पहली टीम ने 2.2 मिलियन की सामान्य आबादी में से 4,73,000 से अधिक कोविड-9 सकारात्मक व्यक्तियों के डेनिश स्वास्थ्य रजिस्ट्री (Danish health registry) डेटा से जानकारी एकत्र की.

निष्कर्षों से पता चला कि O ब्लड ग्रुप वाले लोगों में संक्रमण के परिणाम कम आए, जबकि सबसे अधिक A और AB ब्लड ग्रुप वालें कोरोना वायरस की चपेट में पाए गए थे. इन तीनों ब्लड ग्रुपों में संक्रमण की दरें समान थीं.

ओडेंस यूनिवर्सिटी अस्पताल (Odense University Hospital) के प्रमुख लेखक डॉ टोरेन बर्टिंग (Dr Torben Barington) ने एक बयान में कहा, “उचित नियंत्रण समूह पर विचार करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि विभिन्न जातीय समूहों और विभिन्न देशों में ब्लड ग्रुप का फैलाव काफी भिन्न हो सकता है”.

उन्होंने कहा: “हमारे पास एक मजबूत नियंत्रण समूह का लाभ है – डेनमार्क एक छोटा, जातीय रूप से सजातीय देश है जहां सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और प्रयोगशाला डेटा के लिए एक केंद्रीय रजिस्ट्री है. इसलिए हमारा नियंत्रण जनसंख्या आधारित है जो हमारे निष्कर्षों को एक मजबूत आधार देता है”.

दूसरा अध्ययन

दूसरे अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने वैंकूवर (Vancouver) के एक अस्पताल में 95 गंभीर रूप से बीमार कोविड-19 के रोगियों की जांच की. उन्होंने पाया कि A और AB ब्लड ग्रुप वाले O या B ब्लड ग्रुप वाले लोगों की तुलना में गंभीर लक्षणों के उच्च जोखिम में थे.

शोधकर्ताओं ने पाया कि इन ब्लड ग्रुप वाले रोगियों को मैकेनिकल वेंटिलेशन (mechanical ventilation) पर रखे जाने की अधिक संभावना है. इससे पता चला कि कोरोना वायरस की वजह से ऐसे मरीजों में फेफड़ों के खराब होने और उन्हें डायलिसिस पर रखने की दर अधिक थी. इन रोगियों को कोविड -19 के कारण अंगों के फेल होने का भी खतरा बढ़ गया था.

शोधकर्ताओं ने यह भी नोट किया कि A और AB ब्लड ग्रुप वाले लोग अस्पताल में कुल मिलाकर ज्यादा दिनों तक भर्ती नहीं रहते हैं. हालांकि वे आईसीयू (ICU) में थोड़ा लंबे समय तक भर्ती रहते हैं. कनाडाई टीम के अनुसार यह भी कोविड-19 की गंभीरता के एक बड़े स्तर का संकेत हो सकता है.

ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय (University of British Columbia) के प्रमुख लेखक डॉ मिपिंदर सेखों (Dr Mypinder Sekhon) ने बताया कि हमारे अध्ययन का सबसे अनूठा हिस्सा विभिन्न ब्लड ग्रुप के मरीजों पर कोविड -19 के गंभीर प्रभावों पर केंद्रित होना है.

शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में उल्लेख किया कि हमने इस अध्ययन में कोविड -19 मरीजों के फेफड़े और गुर्दे की क्षति का अवलोकन किया. भविष्य के अध्ययन में हम अन्य महत्वपूर्ण अंगों पर विभिन्न ब्लड ग्रुप और कोविड -19 के प्रभाव पर केंद्रित रखेंगे.