चमकी बुखार का कहर! मुजफ्फरपुर में 55 मामले, तीन मरीजों की मौत

मुजफ्फरपुर (TBN – The Bihar Now डेस्क)| जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (Acute Encephalitis Syndrome) या चमकी बुखार की बीमारी ने इस साल फिर से दस्तक दे दी है. बीती 22 जून तक चमकी बुखार के 55 मामले भर्ती हुए हैं, जिनमें से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है. बता दें 2019 में इस बीमारी की वजह से 200 बच्चों की मौत हुई थी.

मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार (AIS) का कहर फिर से छाने लगा है. यहां श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SKMCH) में बीती 22 जून तक चमकी बुखार के 55 मामले भर्ती हुए हैं, जिनमें से तीन मरीजों की मौत हो चुकी है.

हालांकि, पिछले साल की तुलना में इस साल मामलों में गिरावट देखने को मिल रही है, यह जिला प्रशासन द्वारा व्यापक जागरूकता कार्यक्रम का परिणाम है. जिसमें बच्चों को रात में भूखे पेट सोने से रोकने पर जोर दिया गया है.

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चमकी के मामलों और इससे हुई मौतों में यह तेज गिरावट इस शोध का समर्थन करती है कि 5 साल से कम उम्र के बच्चों में एईएस (चमकी बुखार) कुपोषण की वजह से हुई. लेकिन बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम से मृत्यु दर को कम करने में मदद मिली है. बता दें 2019 में इस बीमारी की वजह से 200 बच्चों की मौत हुई थी.

200 बच्चों की 2019 में हुई थी मौत

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 2019 में चमकी बुखार का कहर देखने को मिला था. इस अस्पताल में 120 से अधिक बच्चों की मौत चमकी से हुई थी. पूरे बिहार में इस बीमारी की वजह से 200 बच्चों की मौत हुई थी.

चमकी बुखार से पीड़ित रोगियों के लिए एसकेएमसीएच में 72 करोड़ से अधिक की लागत से 100 बेड का पीकू (शिशु गहन चिकित्सा यूनिट) और 60 बेड का इंसेफ्लाइटिस वार्ड उस वक्त तैयार किया गया था .

(इनपुट-न्यूज)