अनंत चतुर्दशी व्रत से घर में आती है लक्ष्मी, जानिये इसका महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

हर साल भाद्रपद महीने के चतुर्दशी को मनाया जाने वाला अनंत चतुर्दशी पर्व कल यानि 1 सितम्बर को मनाया जायेगा. वैसे तो 31 अगस्त को सूर्योदय के बाद चतुर्दशी तिथी शुरू हो गई है परंतु शास्त्रों के अनुसार उदया तिथी से यह पर्व 1 सितंबर, मंगलवार को ही मनाया जायेगा.

अनंत चतुर्दशी के दिन का महत्व विशेष रूप से भगवान विष्णु के पूजन के लिए माना जाता है. इस दिन भगवान विष्णु और उनके अनंत अवतारों की पूजा की जाती है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन अनंत देव यानि भगवान विष्णु की पूजा अनेकों गुना अधिक फल देने वाली होती है.

अनंत चतुर्दशी का महत्व

माना जाता है कि अनंत चतुर्दशी का व्रत सबसे पहले पांडवों ने किया था. कहते हैं, महाभारत युद्ध होने से पहले जुआ खेलने के कारण पांडवों का पूरी संपत्ति नष्ट हो गई थी. इस कारण पांडव बहुत परेशान हो गए थे.

इसपर पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के पास जाकर उनके आगे हाथ जोड़ें और अलक्ष्मी से दूर होने के उपाय के बारे में पूछा.

तब श्रीकृष्ण ने पांडवों को बताया कि जुआ खेलने के कारण देवी लक्ष्मी आपलोगों से कुपित हो गई हैं. श्रीकृष्ण ने कहा कि उन्हें देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान विष्णु का पूजन करना होगा. भगवान विष्णु के पूजन से देवी लक्ष्मी प्रसन्न हो जाएगी. उस समय से ही देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अनंत चतुर्दशी का व्रत मनाया जाने लगा.

अनंत चतुर्दशी की संक्षिप्त पूजा विधि

सुबह सुबह नहा धोकर कर साफ कपड़े पहनें. फिर एक छोटी चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं. अब इस चौकी पर भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर विराजित करें. एक पीली डोरी लेकर उसे हल्दी से रंग कर उसमें 14 गांठें लगाएं. फिर इस डोरी को समर्पित कर भगवान विष्णु की पूजा करें.
भगवान विष्णु की प्रतिमा/तस्वीर पर पीले फूल और तुलसी का पत्ता अर्पित करें. फिर विष्णु चालीसा, विष्णु स्तुति और विष्णु आरती के साथ पूजा संपन्न करें. पूजा में भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाएं.

अनंत चतुर्दशी का शुभ मुहूर्त

पूजा का शुभ मुहूर्त – प्रातः 05:59 से लेकर 09:41 तक;
चतुर्दशी तिथि आरंभ : 31 अगस्त, सोमवार, सुबह 08 बजकर 48 मिनट से;
चतुर्दशी तिथि समाप्त : 1 अगस्त, मंगलवार, सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक