स्किल इंडिया मिशन की प्रगति में भारतीय रेल की एक ऊंची छलांग

नई दिल्ली (TBN – The Bihar Now डेस्क)| शुक्रवार को रेल भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में रेल, संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल कौशल विकास योजना का शुभारंभ किया. प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के तत्वावधान में शुरू किये गए इस कार्यक्रम में रेलवे प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से उद्योग से संबंधित कौशल में प्रवेश स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करके युवाओं को सशक्त बनाने का प्रयास किया जाएगा.

इस अवसर पर अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह एक शुभ दिन है, क्योंकि विश्वकर्मा जयंती पूरे देश में मनाई जा रही है. उन्होंने प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई देते हुए उनके जन्मदिन पर रेलवे की ओर से उपहार के रूप में रेल कौशल विकास योजना को समर्पित किया.

उन्होंने कहा कि कौशल विकास का विजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन का अभिन्न अंग है और रेल कौशल विकास योजना के तहत 50 हजार युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य गुणात्मक सुधार लाने के लिए युवाओं को विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण कौशल प्रदान करना है.

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उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि रेल कौशल विकास योजना के तहत दूरस्थ क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाए. उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को प्रशिक्षण प्रक्रिया का लाभ लेना चाहिए.

मंत्री द्वारा आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से शुरू किए गए भारतीय रेल के 75 प्रशिक्षण केंद्रों में पूर्व मध्य रेल के भी 03 प्रशिक्षण केंद्र भी शामिल हैं. पूर्व मध्य रेल के सुपरवाईजर ट्रेनिंग सेंटर/समस्तीपुर, बेसिक ट्रेनिंग सेंटर/हरनौत तथा इलेक्ट्रिक ट्रैक्सन ट्रेनिंग सेंटर, गया कॉलोनी, पंडित दीन दीयाल उपाध्याय नगर में रेल कौशल विकास योजना के अंतर्गत युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा.

इस अवसर पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा सुपरवाईजर ट्रेनिंग सेंटर/समस्तीपुर स्थित प्रशिक्षु अनिकेत कुमार सिंह से उनके ट्रेड को लेकर उनकी रूचि के बारे में पूछा गया. इस अवसर पर समस्तीपुर में पूर्व मध्य रेल के महाप्रबंधक अनुपम शर्मा सहित मुख्यालय तथा मंडल के वरिष्ठ उच्चाधिकारीगण उपस्थित थे.

क्या है रेल कौशल विकास योजना

रेल कौशल विकास योजना के तहत तीन साल की अवधि में 50,000 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा. शुरुआत में, 1,000 उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण चार ट्रेडों में प्रदान किया जाएगा अर्थात – इलेक्ट्रीशियन, वेल्डर, मशीनिस्ट और फिटर तथा इसमें 100 घंटे का प्रारंभिक बुनियादी प्रशिक्षण शामिल होगा. क्षेत्रीय मांगों और जरूरतों के आकलन के आधार पर क्षेत्रीय रेलवे और उत्पादन इकाइयों द्वारा अन्य ट्रेडों में प्रशिक्षण कार्यक्रम जोड़े जाएंगे. प्रशिक्षण नि:शुल्क प्रदान किया जाएगा और प्रतिभागियों का चयन मैट्रिक में अंकों के आधार पर एक पारदर्शी तंत्र का पालन करते हुए ऑनलाइन प्राप्त किए गए आवेदनों में से किया जाएगा. 10वीं पास और 18-35 साल के बीच के उम्मीदवार आवेदन करने के पात्र होंगे. हालांकि इस प्रशिक्षण के आधार पर योजना में भाग लेने वालों का रेलवे में रोजगार पाने का कोई दावा नहीं होगा.

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इस योजना के लिए नोडल पीयू – बनारस लोकोमोटिव वर्क्स द्वारा कार्यक्रम का पाठ्यक्रम विकसित किया गया है, जो मूल्यांकन को मानकीकृत करेगा और प्रतिभागियों के केंद्रीकृत डेटाबेस को बनाए रखेगा. यह योजना शुरू में 1,000 प्रतिभागियों के लिए शुरू की जा रही है, जो अप्रेंटिस अधिनियम 1961 के तहत प्रशिक्षुओं को प्रदान किए जाने वाले प्रशिक्षण के अतिरिक्त होगी.

प्रस्तावित कार्यक्रमों, आवेदन आमंत्रित करने वाली अधिसूचना, चयनित उम्मीदवारों की सूची, चयन के परिणाम, अंतिम मूल्यांकन, अध्ययन सामग्री और अन्य विवरण के बारे में सूचना के एकल स्रोत के रूप में एक नोडल वेबसाइट विकसित की जा रही है. वर्तमान में, आवेदक प्रारंभिक चरण में स्थानीय रूप से जारी विज्ञापनों के प्रत्युत्तर में आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन आवेदन दाखिल करना जल्द ही एक केंद्रीकृत वेबसाइट पर शुरू किया जाएगा.

प्रशिक्षुओं को एक मानकीकृत मूल्यांकन से गुजरना होगा और उनके कार्यक्रम के समापन पर राष्ट्रीय रेल और परिवहन संस्थान द्वारा आवंटित व्यापार में प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा. उन्हें उनके व्यापार के लिए यथोचित टूलकिट भी प्रदान किए जाएंगे, जिससे इन प्रशिक्षुओं को अपनी शिक्षा का उपयोग करने और स्व-रोजगार के साथ-साथ विभिन्न उद्योगों में रोजगार की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.

पूरे देश के युवाओं को इसमें शामिल करने के लिए, उपरोक्त ट्रेडों में प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से देश भर में फैले 75 रेलवे प्रशिक्षण संस्थानों को चिन्हित किया गया है. यह योजना न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता में सुधार करेगी, बल्कि स्वरोजगार के कौशल को भी उन्नत करेगी. साथ ही, पुन: कौशल और अप-स्किलिंग के माध्यम से ठेकेदारों के साथ काम करने वाले लोगों के कौशल में भी सुधार होगा जिससे स्किल इंडिया मिशन में योगदान मिलेगा.

इस अवसर पर रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनीत शर्मा तथा रेलवे के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे.