न्यूज 11 भारत के मालिक को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत

रांची (TBN – The Bihar Now डेस्क)| झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) ने मंगलवार को टीवी चैनल न्यूज 11 भारत के मालिक अरूप चटर्जी (News 11 Bharat owner Arup Chatterjee) की बेल याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.

न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसके द्विवेदी (Justice SK Dwivedi) की अदालत में अरूप चटर्जी की पत्नी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने पत्रकार अरूप चटर्जी को 50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया. मामले पर अगली सुनवाई 22 अगस्त को होगी.

अदालत ने यह कहते हुए अरूप चटर्जी को बेल दिया कि उनकी गिरफ्तारी में सीआरपीसी के प्रविधानों का पालन नहीं किया गया है. इससे पहले, अरूप की पत्नी बेबी चटर्जी ने सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट में बेल याचिका डाली थी. अरूप के वकील नवीन कुमार ने अदालत से “मेन्शन” कर याचिका पर विशेष सुनवाई की मांग की थी जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मंगलवार को सुनवाई की.

बेबी चटर्जी ने आरोप लगाया था कि उनके पति को साजिश के तहत अवैध कोयला कारोबार करने वालों ने फंसाया है. उसके पति ने किसी से रंगदारी की मांग नहीं की है. बल्कि अवैध कोयला कारोबारियों की खबर अपने टीवी चैनल पर दिखाने के कारण यह साजिश रची गई.

बता दें, शनिवार देर रात धनबाद पुलिस ने अरूप चटर्जी को रांची से गिरफ्तार किया था. धनबाद पुलिस ने एक कोयला व्यापारी द्वारा उसके खिलाफ रंगदारी की शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई की थी. इस कोयला व्यापारी का नाम राकेश ओझा है जो बिहार के पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे का दामाद है.

यह भी पढ़ें| लखनऊ प्रशासन मामले को गंभीरता से लें, लुलु मॉल विवाद पर बोले सीएम योगी

राकेश ओझा का धनबाद के गोव‍िंदपुर में श‍िवम हार्ड कोक नामक कंपनी है. राकेश ओझा ने अरूप चटर्जी पर आरोप लगाया है कि अरूप ने उनसे 11 लाख रुपये की रंगदारी मांगी है. 6 लाख रुपये दे भी दिया गए थे, बावजूद इसके अरूप द्वारा रुपये नहीं देने पर बर्बाद कर देने की धमकी दी गई.

चटर्जी को रांची पुलिस (Ranchi police) की मदद से रात में कांके रोड (Kanke Road) स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया. रविवार 17 जुलाई को सुबह करीब 11 बजे उन्हें धनबाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया. मजिस्ट्रेट ने उसे जेल भेजने का आदेश दिया था.

अरूप चटर्जी ने जेल जाते समय मीडिया को बताया था कि उन्हें धनबाद पुलिस ने 2000 करोड़ रुपये से अधिक के कोयले के अवैध कारोबार का पर्दाफाश करने के लिए फंसाया है.