क्रूज शिप ड्रग मामला: यह हैं आर्यन खान के जमानत के आधार

मुंबई (TBN – The Bihar Now डेस्क)| बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान ने मुंबई सत्र न्यायालय में अपनी जमानत अर्जी में इस बात को आधार बनाया है कि उन्हें क्रूज शिप ड्रग मामले में झूठा फंसाया गया है. बता दें, क्रूज शिप ड्रग मामले में आर्यन मुख्य आरोपी बनाए गए हैं.

आर्यन खान ने निम्नलिखित आधारों पर जमानत मांगी है:

1. उन्होंने पहला आधार यह बनाया है कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा उनके पास से न तो किसी प्रतिबंधित पदार्थ जप्त हुई है और न ही उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक सामग्री मिली है.

2. दूसरा आधार यह बनाया गया है कि भले ही उसके पास से कोई प्रतिबंधित पदार्थ जप्त नहीं हुई थी, बावजूद इसके यह मानते हुए कि उसके खिलाफ आरोप सही हैं, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट (Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act) की धारा 20 (बी) के तहत इसकी अधिकतम सजा 1 वर्ष तक है;

3. आर्यन खान के खिलाफ अपराध एनडीपीएस अधिनियम की धारा 8 (सी), 20 (बी), 27, 28, 29, 35 हैं. लेकिन चूंकि उसके पास से कोई नारकोटिक ड्रग्स या साइकोट्रोपिक पदार्थ बरामद नहीं हुआ है, इसलिए एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 के तहत जमानत देने पर रोक लागू नहीं होगी.

4. जमानत याचिका में यह कहा गया है कि यह देखते हुए कि आर्यन खान के पास से कोई नशीला पदार्थ या मनोदैहिक पदार्थ (psychotropic substances) जब्त नहीं किया गया है, यह मानते हुए कि उन्हें सही माना जाता है, सख्ती से छोटी मात्रा से संबंधित होगा, एनडीपीएस अधिनियम की धारा 37 (1) के तहत बार लागू नहीं होगा.

5. याचिका में यह भी आधार बनाया गया है कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय में पहले पारित हुए आदेशों के आलोक में अन्य अभियुक्तों से की गई बरामदगी को आर्यन खान के खिलाफ नहीं इस्तेमाल किया जा सकता है और न ही सभी वस्तुओं की रिकवरी को उसके खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता है;

यह भी पढ़ें|आर्यन खान के ड्रग्स केस पर महबूबा मुफ्ती ने उठाए केंद्रीय एजेंसी पर सवाल

6. जमानत याचिका में कहा गया है कि एनसीबी द्वारा किया गया यह केस सिर्फ व्हाट्सएप चैट,जिसकी प्रामाणिकता की पुष्टि पूरी तरह से नहीं की गई है, पर निर्भर है. इसके अलावा, “इन कथित चैट में ऐसा कुछ नहीं मिला है जिससे यह सिद्ध हो कि इनका ड्रग मामले से कोई संबंध है”;

7. याचिका में कहा गया है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक युवा आरोपी को इस आधार पर जमानत दी थी कि उसका पहले का कोई आपराधिक इतिहास नहीं था और यह वर्तमान मामले के तथ्यों के समान है;

8. एनडीपीएस अधिनियम के तहत प्रावधानों को बिना किसी सबूत के या अपराधों के लिए सामग्री का समर्थन करने के लिए सबूत के बिना यांत्रिक रूप से लागू किया गया है;

9. आर्यन खान के संबंध में कोई विश्वसनीय या स्वीकार्य सामग्री नहीं है जिसे एनसीबी रिमांड आवेदनों में भी दिखाने में कामयाब रहा है;

10. इस केस में ऐसा कुछ भी नहीं है कि जिससे यह साबित हो कि आर्यन खान किसी भी तरह से नशीली पदार्थों के निर्माण, कब्जे, खरीद या परिवहन से जुड़ा हुआ है और इस कारण एनडीपीएस अधिनियम के तहत अपराध का कोई कारण नहीं बनता है;

11. याचिका में कहा गया है कि केवल किसी विशेष लेनदेन के लिए पैसा देना धारा 27ए के दायरे में नहीं आएगा, जैसा कि बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा रिया चक्रवर्ती के मामले में कहा गया था.

12. सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का जिक्र करते हुए, आर्यन खान के आवेदन में कहा गया है कि हिरासत का उद्देश्य अभियुक्त को उसके दोषी सिद्ध होने से पहले उसे ‘दोषी होने का स्वाद’ देना नहीं है.

यह भी पढ़ें| शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा का निकाह सम्पन्न, तेजस्वी यादव हुए शरीक

13. याचिका में कहा गया है कि आर्यन खान “एक प्रमुख बॉलीवुड फिल्म अभिनेता के बेटे हैं” जिनका समाज में अच्छी पकड़ है. याचिका में आश्वासन दिया गया है कि बेल मिलने के बाद वे सबूतों या गवाहों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे और न ही “जमानत दिए जाने पर अपनी स्वतंत्रता का दुरुपयोग” करेंगे.

14. आर्यन खान ने अपनी जमानत अर्जी में कहा कि यह देखते हुए कि अपराध जमानती हैं, वह जमानत देने के लिए तैयार और तैयार हैं, जिसके आलोक में जमानत दी जा सकती है.

आपको बता दें, इसके पहले अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आरएम नेर्लिकर ने यह कहते हुए जमानत अर्जी खारिज कर दी थी कि आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है क्योंकि केवल विशेष सत्र अदालत ही जमानत याचिका पर सुनवाई कर सकता है.

उस आदेश के आलोक में, आर्यन खान ने अपनी जमानत के लिए एनडीपीएस अधिनियम के तहत विशेष अदालत का रुख किया है. अब उनकी जमानत याचिका पर 13 अक्टूबर बुधवार को सुनवाई होगी.