भारतीय न्याय प्रणाली को पुनर्जीवित करने का संकल्प लें: अभिनव कुमार

हैदराबाद (TBN – The Bihar Now डेस्क)| गणतंत्र दिवस के अवसर पर हैदराबाद स्थित चैतन्य भारती इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Chaitanya Bharti Institute of Technology), मॉडल संयुक्त राष्ट्र (CBIT-MUN) की ओर से “भारतीय पुनर्जागरण-भविष्य की पीढ़ियों के लिए भारत की खोई हुई विरासत को पुनर्जीवित करना” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का वर्चुयल आयोजन (Virtual National Seminar On the theme “Indian Renaissance – Reviving India’s Lost Heritage for Future Generations”) किया गया. सब्जेक्ट एक्सपर्ट के तौर पर दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अभिनव कुमार, इस्कॉन से जुड़े स्वामी श्री गौरंगा दास प्रभु, डॉ. संपदानंद मिश्रा और सामाजिक कार्यकर्ता मोनिका रेड्डी जी ने विचार रखे.

भारत की न्याय प्रणाली सर्वश्रेष्ठ

विधि विशेषज्ञ प्रो. अभिनव कुमार, दिल्ली विश्वविद्यालय ने ‘हम भारत के लोग’ का सही अर्थ समझाया और भारतीय संविधान की धारा 1950 के अनुच्छेद-1 के संबंध में विस्तृत चर्चा की. उन्होंने संविधान की भारतीय विशेषताओं और वर्तमान में गणतंत्र के अर्थ की व्याख्या प्रस्तुत की. प्रो. अभिनव कुमार ने कहा कि कानूनी प्रणाली के भारतीयकरण पर चर्चा करना समय की मांग है. हमारी आने वाली पीढ़ी को तार्किक रूप से भारतीय कानून प्रणाली के सभी पहलुओं की समग्रता में जानकारी होनी चाहिए.

भारतीयता के प्रचार पर जोर

बेविनार में आज के वर्तमान परिस्थिति में भारतीयता के प्रचार-प्रसार और उसकी प्रासंगिकता पर वक्ताओं ने अपने विचार प्रकट किये. स्वामी गौरंग दास प्रभु ने कहा कि भारतीय विचारों, मूल्यों और विश्वदृष्टि को देखते हुए भारतीय आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को सही दिशा में निर्देशित करना अनिवार्य हो गया है. मोनिका रेड्डी ने कहा कि सदियों पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित करने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है. भारतीय संस्कृति के मूल्यों से बगैर छेड़छाड़ किये आधुनिकता के साथ कैसे तालमेल बिठाया जा सकता है. आज के युवाओं को सबसे अच्छी सलाह इसी बात की दी जानी चाहिए.

16 सदस्यों की संचालन टीम

संचालन के क्रम में नमन वंकादारी ने दर्शकों के बीच भारतीय संस्कृति और विरासत के मुख्य बिंदुओं को प्रस्तुत किया. सेमिनार संचालन का कार्य अनुष्का बेरा, वैशाली दांडू वर्मा के साथ-साथ सीबीआईटीएमयूएन सचिवालय टीम के 16 सदस्यीय टीम ने किया. इसमें 450 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी दर्ज हुई. डॉ. के. जगन्नाथ राव और सीबीआईटीएमयूएन के संकाय समन्वयक डॉ. शगुफ्ता परवीन ने भी अपने विचार रखे.

कार्यक्रम के आखिरी चरण में प्रश्नोत्तरी का सत्र चला जिसमें दर्शकों के सवालों और जिज्ञासाओं का जवाब पैनेलिस्ट टीम ने बारी-बारी से दिया. सीबीआईटीएमयूएन हैदराबाद एक अनोखी पहल है और अपने स्तर का पहला मॉडल है. इसने अबतक एमयूएन के दस संस्करणों का सफलतापूर्वक आयोजन और नेतृत्व किया है, जिसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक भागीदारी देखी गई है.