कब है धनतेरस और क्या है मुहूर्त – जानिए यहां

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क) | हर साल की तरफ इस साल सभी त्योहारों के मनाने का तरीका अलग है. पूरे देश में फैली कोरोना बीमारी की वजह से इस साल त्योहारों में लोग ज्यादा सतर्क और सावधान हैं. इसी कोरोना काल में देश धन्वन्तरि त्रयोदशी 13 नवम्बर यानी शुक्रवार को मनाने जा रहा है.

जैसा कि मालूम है, धन्वन्तरि त्रयोदशी दीवाली के दो दिन पहले कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन को भगवान धन्वन्तरि, जो कि आयुर्वेद के पिता और गुरु है, उनके जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है. भगवान धन्वन्तरि देवताओं के चिकित्सक है और भगवान विष्णु के अवतारों में से एक माने जाते हैं. धन्वन्तरि त्रयोदशी के दिन को धन्वन्तरि जयन्ती के नाम से भी जाना जाता है.

पुराणों में उद्धृत है कि इसी दिन समुद्र मन्थन के दौरान धन्वन्तरि अमृत पात्र के साथ प्रकट हुए थे. इसीलिए जो लोग आयुर्वेद और दवाओं का अभ्यास करते हैं, उनके लिए धन्वन्तरि त्रयोदशी का दिन बहुत महत्वपूर्ण है. इस दिन लोग भगवान धन्वन्तरि की पूजा करते हैं और उनसे अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हैं.

धनतेरस पूजा को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है. धनतेरस का दिन धन्वन्तरि त्रयोदशी या धन्वन्तरि जयन्ती, जो कि आयुर्वेद के देवता का जन्म दिवस है, के रूप में भी मनाया जाता है।

धनवंतरि और कुबेर की पूजा

भगवान धनवंतरि को विष्णु का रूप माना जाता है जो हाथ में अमृत कलश धारण किये होते हैं. इन्हें पीतल पसंद है इसलिए धनतेरस को पीतल या अन्य किसी धातु के सामान खरीदे जाते हैं. आरोग्य के देवता धनवंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा धनतेरस के दिन की जाती है.

यम का दीप

धनत्रयोदशी के दिन परिवार के किसी भी सदस्य की असामयिक मृत्यु से बचने के लिए मृत्यु के देवता यमराज के लिए घर के बाहर दीपक जलाया जाता है. इसे यम दीपम के नाम से जाना जाता है. इस धार्मिक संस्कार को त्रयोदशी तिथि के दिन किया जाता है.

धनतेरस पूजा / धनत्रयोदशी पूजा

धनत्रयोदशी या धनतेरस के दौरान लक्ष्मी पूजा को प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए जो कि सूर्यास्त के बाद प्रारम्भ होता है और लगभग २ घण्टे २४ मिनट तक रहता है.

धनतेरस पूजा को करने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रदोष काल के दौरान होता है जब स्थिर लग्न चलता रहता है. ऐसी मान्यता है कि अगर स्थिर लग्न के दौरान धनतेरस पूजा की जाये तो घर में माँ लक्ष्मीजी का स्थाई निवास होता है. इसीलिए धनतेरस पूजन के लिए यह समय सबसे उपयुक्त होता है. वृषभ लग्न को स्थिर माना गया है और दीवाली के त्यौहार के दौरान यह अधिकतर प्रदोष काल के साथ अधिव्याप्त होता है.

धनतेरस पूजा का मुहूर्त

धनतेरस पूजा मुहूर्त – सायं 05:06 से सायं 05:59 तक (अवधि – 00 घण्टे 53 मिनट्स) – यह समय राजधानी पटना के लिये है.

यम दीपम का मुहूर्त

प्रदोष काल – सायं 05:28 से रात्री 08:07 तक
वृषभ काल – सायं 05:32 से सायं 07:28 तक

त्रयोदशी तिथि 12 नवम्बर को रात 09:30 बजे शुरू होकर 13 नवम्बर शाम 05:59 बजे खत्म होगा.