बिहार की दो बेटियों को राष्ट्रपति द्वारा मिला राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार

पटना / नई दिल्ली (TBN – The Bihar Now डेस्क)| शुरू से ही सेवा भाव का राज्य कहा जाने वाला बिहार पुनः आज अपनी दो बेटियों के कारण गर्व महसूस कर रहा है. बुधवार को बिहार की बेटियां रंजू कुमारी और बंदना कुमारी को राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार (National Florence Nightingale Awards) से नवाजा. राष्ट्रपति कोविंद (Ram Nath Kovind) ने देश भर से चुने हुए नर्सिंग कर्मियों को नेशनल फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवार्ड प्रदान किए.

इन दोनों को राष्ट्रपति ने वर्चुअल माध्यम से पुरस्कार प्रदान किया. इसमें दोनों को प्रशस्तिपत्र, 50 हजार रुपये तथा दो साल का सेवा विस्तार दिया गया. नर्सिंग में निःस्वार्थ मानव सेवा के लिए बिहार की इन दोनों बेटियों का योगदान बहुत सराहनीय है. इसी साल शुरू में इंडियन नर्सिंग काउंसिल ने इन दोनों के नाम घोषित किये थे.

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि नर्सिंग वास्तव में कई स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने और व्यक्तियों, समुदायों तथा समाज की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. नर्स और दाई अक्सर लोगों और स्वास्थ्य प्रणाली के बीच संपर्क का पहला बिंदु होती हैं.

Also Read| स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है – प्रियदर्शी

उन्होंने कहा कि नर्स और दाई न केवल स्वास्थ्य संबंधी सतत विकास के लक्ष्यों (एसडीजी) को पूरा करने में योगदान करती हैं, बल्कि शिक्षा, लिंग संवेदीकरण और राष्ट्र के आर्थिक विकास में भी योगदान देती हैं. वे स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और हमारे स्वास्थ्य सेवा वितरण के लिए महत्वपूर्ण हैं.

क्या है फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार

स्वास्थ्य कर्मियों के योगदान को मान्यता देने के लिए यह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत एक वैधानिक एजेंसी भारतीय नर्सिंग परिषद (Indian Nursing Council) द्वारा फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार दिया जाता है.

भारत सरकार ने सन 1973 में इस पुरस्कार की स्थापना नर्सों के अनुकरणीय कार्यों को सम्मानित करने के लिए की थी. इस मेडल का निर्माण रेड क्रॉस सोसाइटीज के आठवें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रतिनिधियों द्वारा किया गया था.