संघर्षरत किसानों पर दमन करना बन्द करो – वामदल

पटना (अखिलेश कु सिन्हा – The Bihar Now रिपोर्ट)| वामपंथी दलों सीपीआई (एम), सीपीआई॰, सीपीआई (माले) लिबरेशन ने संयुक्त रूप से अगामी 2 दिसंबर 2020 को केन्द्र सरकार द्वारा संघर्षरत किसानों पर किये जा रहे दमनात्मक कार्रवाइयों के खिलाफ प्रतिरोध एवं किसानों की माँगाों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है.

सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में दलों ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा कोरोना महामारी के दौर में संसद में तमाम जनतांत्रिक प्रक्रियाओं को तिलांजली देते हुए अत्यन्त ही विनाशकारी कृषि कानूनों को पारित कर देश के उपर थोप दिया है. संसद से लेकर खेतों खलिहानों तक इन कानूनों को वापस लेने की माँग को लेकर व्यापक स्तर पर प्रतिरोध फूट रहे है. पिछले दो महीनों से पंजाब, हरियाणा, पश्चिम उतर प्रदेष तथा देश  के हर राज्यों के किसान आन्दोलनरत है.

सरकार की हठ धर्मिता से आजिज आकर किसानों ने दिल्ली को जोड़ने वाले तमाम उच्च पथों को जाम कर दिया है. वे शान्तिपूर्ण ढंग से अपनी माँगों को रखने के लिये रामलीला मैदान या जंतर मंतर जाना चाहते है, लेकिन प्रधान मंत्री मोदी ने अपनी मन की बात में कृषि कानूनों की तारीफों के पुल बांधने का काम किया है, जो संघर्षरत किसानों के घावों पर नमक छिड़कने का काम है.

केन्द्र की सरकार न सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्रों को देशी विदेशी कारपोरेट के हाथों सौप रही हैं बल्कि जमीन, तथा तमाम प्राकृतिक संसाधन भी कम्पनियों के हाथों में सौंपकर देश पर कम्पनी राज थोपना चाहती है.

आज किसान केन्द्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जंगें  मैदान में है. अतः तमाम वामपंथी दल बिहार की जनता से अपील करते है कि वे 02 दिसम्बर को बड़ी संख्या में संघर्षरत किसानों के समर्थन में बाहर निकल कर उनके उपर हो रहे दमन के खिलाफ प्रतिरोध एवं संघर्ष के साथ एकजुटता प्रदर्शित करें.

इस बीच बिहार में किसानों के धान की खरीद नहीं हो रही है अतः किसान उन्हें आने-पौने कीमतों पर बेचने को मजबूर है. बिहार में न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी के साथ सभी स्तरो पर क्रय केंन्द्र खोलकर धान खरीदा जाय.

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