प्रधानाध्यापक बहाली नियमावली के विरोध में 05 सितंबर को राज्यव्यापी शिक्षक सत्याग्रह

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| बिहार के प्राथमिक विद्यालयों में प्रधान शिक्षक और मध्य एवं उच्च विद्यालयों में प्रधानाध्यापक बहाली को लेकर राज्य सरकार द्वारा लाये गये नये पर नियमावली पर बहस तेज हो गई है. सूबे के टीइटी एसटीइटी शिक्षकों में इस बात को लेकर तीखा आक्रोश देखा जा रहा है. टीइटी एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट बिहार ने ऐलान किया है कि नियमावली के विरोध में आगामी 04 एवं 05 सितंबर को राज्यव्यापी सत्याग्रह मनाया जाएगा.

बताते चलें कि सरकार ने सूबे के प्राथमिक मध्य एवं उच्च विद्यालयों में प्रधानशिक्षक एवं प्रधानाध्यापक बहाली को लेकर बीपीएससी के जरिये परीक्षा लेने का निर्णय लिया है. प्रधानशिक्षक एवं प्रधानाध्यापक बहाली नियमावली में परीक्षा में बैठने के लिए कार्यरत बेसिक ग्रेड शिक्षकों को आठ साल सेवा अवधि की बाध्यता एवं हाईस्कूल के शिक्षकों के लिए आठ और दस साल सेवा अवधि की बाध्यता निर्धारित कर दी गई है.

दूसरी तरफ शिक्षा अधिकार कानून और नयी शिक्षा नीति 20 को दरकिनार करते हुए टीइटी एसटीइटी अनिवार्यता की बाध्यता को समाप्त कर दिया गया है. टीइटी एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट बिहार ने सरकार द्वारा लाये गये इस बहाली नियमावली को भेदभाव और षडयंत्रपूर्ण साजिशों का पुलिंदा करार दिया है.

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मार्कंडेय पाठक और प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पांडेय ने कहा कि जब अध्यापक की बहाली के लिए टीइटी अनिवार्य है तो प्रधानाध्यापक की बहाली के लिए टीइटी अनिवार्यता को समाप्त करने का क्या आधार है?

पांडेय ने कहा कि प्रधानाध्यापक बहाली की परीक्षा में बैठने के लिए कार्यरत बेसिक ग्रेड शिक्षकों को आठ साल सेवा अवधि की बाध्यता और हाईस्कूल के शिक्षकों के लिए आठ और दस साल सेवा अवधि की बाध्यता सीधे सीधे शिक्षकों को उसके परीक्षा में बैठने के बुनियादी हकों पर हमला है.

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संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि नियमावली के जरिये सरकार टीइटी एसटीइटी शिक्षकों से भेदभाव और उन्हें दरकिनार करने की साजिश कर रही है. शिक्षक चुप नही बैठनेवाले हैं. इस मसले पर सड़क से लेकर न्यायालय तक पुरजोर विरोध किया जायेगा.

संगठन के प्रदेश सचिव अमित कुमार और प्रदेश मीडिया प्रभारी राहुल विकास ने कहा कि सरकार को न तो विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से लेना देना है न ही विद्यालयों में व्याप्त अराजकता को दूर करने का उसके पास कोई रोडमैप है.

उन्होंने कहा कि यदि प्रोन्नति पदोन्नति के बजाय परीक्षा ही अगर बहाली का आधार है तो सूबे के टीईटी एसटीइटी शिक्षक पहले से परीक्षा पास करके बहाल हुए हैं. सरकार सूबे के टीईटी एसटीइटी शिक्षकों का अलग संवर्ग अबतक गठित क्यों नहीं की है ?

उन्होंने कहा कि विधिविरुद्ध नियमावली बनाते हुए विभिन्न कोटि के शिक्षकों को आपस में लड़ाने की साजिश हो रही है. सूबे के टीइटी शिक्षक सरकार की इन साजिशों के खिलाफ मजबूती से अपना प्रतिरोध तेज करेंगे.

उन्होंने ऐलान किया कि विरोध अभियान चलाते हुए आगामी 04 एवं 05 सितंबर को राज्यव्यापी सत्याग्रह मनाते हुए लोकतांत्रिक तरीके से सूबे के तमाम जिला मुख्यालयों पर प्रतिरोध का कार्यक्रम आयोजित होगा.