शाहीन बाग का कड़वा सच

 

शाहीन बाग में एकत्रित विभिन्न दलों के राजनीतिज्ञ, कुछ अलग हट कर अपनी सोच को बताने वाले, कभी स्वयं को सेक्युलर बताने वाले, CAA और NRC के नाम पर राजनीति में अपना सिक्का चमकाने वालों से ज्यादा और कुछ नजर नहीं आते. जिनमें से आधे से ज्यादा लोगों को CAA और NRC का मतलब भी नहीं पता. जिस तरह देश की जनता को भ्रमित कर अपनी साख बनाने वाले चाहे वो किसी भी धर्म या जाति के हो वो जनता या किसी भी समाज के हितेषी कभी नहीं हो सकते.

शाहीन बाग की तुलना जलियां वाले बाग से करने वालों पर बड़ा ही आश्चर्य होता है. पर शाहीन बाग में जिस तरह का माहौल देखने को मिला उसे देख के लगता है कि शाहीन बाग राजनीति और धर्म के नाम पर अपनी रोटियां सेकने वालों के नाम से भविष्य में जाना जाएगा जो लोग देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और देश का विकास करने जैसे मुद्दों पर हमेशा से ही सरकार से बहस करते रहे. आज उनके ही इशारों पर कुछ असमाजिक तत्व देश को आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचा रहे हैं. आर्थिक नुकसान के असंख्य उदाहरण हमारे सामने हैं और उन सब नुकसान के लिए जिम्मेदार है लोगों की मानसिकता. जो किसी भी तरह के लुभावने वादों में आकर अच्छे और बुरे की पहचान करने में असमर्थ हो जाती है.

कुछ लोग पिकनिक और मौजमस्ती का नज़रिया लेकर इस तरह के आंदोलन में शामिल होते हैं. जबकि उनको CAA और NRC जैसे मुद्दों के बारे में कुछ भी जानकारी नहीं होती है उनका मकसद बस टाइम पास करना मात्र रह गया है.

शाहीन बाग में एक चैनल के रिपोर्टर दीपक चौरसिया और उनकी टीम पर हमला जिसमें कैमरामेन घायल हो गया. क्या इस तरह के हमलों में कुछ अराजकतत्व शामिल होते हैं या फिर ये हिंसात्मक आंदोलन करने की चेतावनी है.

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें असम को काटने की बात करते हुए देश के टुकड़े टुकड़े करने के लिए ये किस तरह की साजिश रची जा रही है.

कुमार विश्वास ने इस सब पर अपनी नाराज़गी जताते हुए पोस्ट किया और कहा  कि

“गणतंत्र-दिवस से एक दिन पहले,सैकड़ों कैमरों और हज़ारों देशवासियों के सामने,देश की राजधानी में वो खुलेआम कह रहे हैं कि…
“असम को भारत से काटना है !”
“पाँच लाख लोग अगर दिल्ली की तरफ़ चल दें तो भारत कुछ नहीं कर सकेगा”
“दिल्ली से बंगाल तक रेल की पटरियों में मवाद भर दो “😡
और लोग हमें ज्ञान दे रहें हैं कि हमें “यह सब” अवॉइड करना चाहिए ? 👎👞
(सब जानते हैं कि यह किस के इशारे पर हो रहा है ! कौन है जो वहाँ न जाकर भी अपने अमानती गुंडे से यह माहौल बनवाए हुए है ! चुनाव न होता और उसे वोट की न पड़ी होती तो अब तक तो LG हॉउस की तरह वो सबको लेकर वहीं पड़ा होता😡)”

दी बिहार नाउ की अपील है कि हिन्दुस्तान सबका है चाहे वो किसी भी धर्म का हो. अगर कोई भी कानून भारत की सरकार के द्वारा लाया जाता है तो उसका सम्मान करना भारत के नागरिक होने के नाते सबका कर्तव्य है. भारत एक लोतांत्रिक देश है जहां सबको अपनी बात रखने का अधिकार है. लोग विरोध प्रकट करते वक्त किसी भी तरह की हिंसा या राष्ट्र की किसी भी सम्पत्ति को किसी भी तरह का नुक़सान ना पहुंचाए, ये भी उनकी जिम्मेदारी है.