कोविड लहर के दौर में मनोवैज्ञानिक सहयोग काफी अहम

बेंगलुरू / नई दिल्ली (TBN – The Bihar Now डेस्क)| एक समाज के रूप में हमारे लिए दया और समझ विकसित करना सबसे अहम बात है. कोविड-19 एक वैश्विक समस्या है, क्योंकि सभी लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इससे समस्या हो रही है. “अपने भीतर प्रकाश की खोज : मानसिक स्वास्थ्य और महामारी” विषय पर हुए एक वेबिनार में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस तरह के विचार व्यक्त किए.

पत्र सूचना कार्यालयऔर क्षेत्रीय संपर्क कार्यालय, महाराष्ट्र एवं गोवा क्षेत्र द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित वेबिनार के विशेषज्ञों के पैनल में एनआईएमएचएएनएस, बंगलुरू के मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर – डॉ. प्रतिमा मूर्ति, विभागाध्यक्ष और मनोविज्ञान की प्रोफेसर और डॉ. ज्योत्सना अग्रवाल, सहायक प्रोफेसर शामिल थीं.

इस वेबिनार में विशेषज्ञों द्वारा कोविड के दौर में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से निपटने के तरीके सुझाए गए हैं :

इस दौर में एक उपयुक्त दिनचर्या अहम है. यह ऐसा काम है, जिस पर हमारा नियंत्रण है. अच्छी खुराक, अच्छी नींद, अच्छी दिनचर्या, पर्याप्त व्यायाम, विचारों को शांत करना, चिह्नित समस्याओं से उबरने की रणनीतियों, समाधान को समझना और संपर्क करना संभव होने जा रहा है.

हमें अच्छी नींद लेने की जरूरत है; नींद से जुड़ी आदतें काफी अहम है, इन गतिविधयों को दूसरी गतिविधियों के चलते प्रभावित नहीं होना चाहिए.

खुद पर नियंत्रण रखें, अच्छी खुराक लें, पर्याप्त पानी लें और सबसे ज्यादा अहम यह सुनिश्चित करना है कि ऑक्सीजन के स्तर पर नजर रखी जाए जिससे किसी भी तरह की समस्या होने पर उस व्यक्ति को जरूरी मदद मिलनी चाहिए.

दुख की स्थिति में काउंसलिंग काफी अहम है. हम एक ऐसे दौर में हैं, जब बड़ी संख्या में लोग शोकसंतप्त हैं और भारी नुकसान से गुजर रहे हैं. यह संबंधों का और वित्तीय नुकसान भी हो सकता है. दुख एक बड़ी भावनात्मक प्रतिक्रिया है. इसके माध्यम से लोगों की सहायता करना काफी अहम है.

बच्चों को एक दूसरे से जुड़ा रहना चाहिए, शौक विकसित करने चाहिए, दूसरों की मदद करनी चाहिए. साथ ही नए काम करने और रचनात्मक बने रहना चाहिए, जितना वे कर सकते हैं.

अर्थपूर्ण संबंध विकसित करें, जो आपके उद्देश्यों में मदगार हों.

अपने आसपास लोगों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना तनाव से निपटने का एक अच्छा तरीका है.

एक डायरी या बॉक्स बनाएं जिसमें आप अपनी चिंताओं को जमा करें और उन्हें अपने दिमाग में रखने के बजाय उनकी चिट बना लें. इससे आपको ज्यादा ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलेगी.

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किसी परेशान व्यक्ति के लिए सहायता मांगना अच्छा हो सकता है.

नकारात्मक विचारों को सकारात्मक विचारों से नहीं बदलें, बल्कि इससे यथार्थवादी विचारों को आत्मसात करने की कोशिश करें. नकारात्मक विचारों को खत्म करने के लिए किसी के प्रति दयालु होना महत्वपूर्ण है.

याद रखें कि हम सभी इस समय एक साथ हैं.

समाज और व्यवस्था को अपने फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए अपना समर्थन देने की जरूरत है.

हमें उपयुक्त तरीके से तकनीक के इस्तेमाल की जरूरत है. मोबाइल फोन, डिजिटल जुड़ाव, महिला तकनीक विशेषज्ञों से हमें खासी मदद मिली है; इसके साथ ही हमें डिजिटल दूरी की भी जरूरत है.

अपने पसंद के काम करके ध्यान भटकाना काफी अहम है. योग, संगीत, दूसरों के साथ जुड़ना और सांस लेने से जुड़े व्यायामों से सहज होने में मदद मिल सकती है.

वास्तविक समाचार स्रोतों से जुड़ना और नकारात्मक व अवास्तविक जैसे अन्य स्रोतों, जो आपकी चिंता बढ़ाते हैं, से दूर होना जरूरी है.

पत्रकारों द्वारा सकारात्मक मनोविज्ञान पर ज्यादा ध्यान दिए जाने की जरूरत है.

किसी के आध्यात्मिक पहलू से जुड़ने से भी कई लोगों को ऐसे मुश्किल दौर से उबरने में मदद मिल सकती है. पवित्र ग्रंथों से मृत्यु और नुकसान से उबरने में मदद मिल सकती है.

यदि दो सप्ताह या ज्यादा समय से अवसाद से गुजर रहे हों, यदि एक व्यक्ति खाना नहीं खा रहा है, वजन कम हो रहा हो, हर समय चिल्ला रहा हो, दोषी महसूस कर रहा हो तो ऐसे समय में व्यक्ति को संभावित रूप से विशेषज्ञ की मदद की जरूरत होती है.

यदि तनाव के चलते दौरा पड़ने के कारण व्यक्ति कोई काम नहीं कर पा रहा हो तो मदद लेना अहम हो जाता है.

पहले से मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को कहां ले जाना है, यह जानना महत्वपूर्ण है. उनके लिए, नियमित रूप से मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर के पास ले जाना, अनुवर्ती जांच और समर्थन नेटवर्क इस दौर में काफी मददगार होगा, क्योंकि इस दौर में ऐसे मरीज काफी दबाव में हो सकते हैं.

एक बच्चा जिसके माता-पिता की बीमारी के चलते मौत हो गई है तो उसकी देखभाल और खाने में कमी हो सकती है. यदि बच्चे की दैनिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं तो बच्चे के लिए पेशेवर का मार्गदर्शन लेना चाहिए. यह असामान्य दौर है, यदि बच्चा गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है, उसकी दैनिक गतिविधियों पर असर पड़ रहा हो तो पेशेवर का सहयोग लेना बच्चे की उम्र पर निर्भर करता है.

मनोवैज्ञानिक समर्थन के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन 080-46110007 पर एनआईएमएचएएनएस को कॉल करें. हर राज्य/ केन्द्र शासित प्रदेश की अपनी हेल्पलाइन है. मदद की जरूरत होने पर समर्थन के लिए सहयोग करें.

व्यवस्था हर कहीं मौजूद है, मानसिक स्वास्थ्य को ज्यादा महत्व दें और ज्यादा संसाधन लगाएं. मानसिक स्वास्थ्य पर संस्थागत नीतियां बनाना काफी अहम है. जांच और उपचार सुविधाएं, रेफरल नेटवर्क, साथियों के सहयोग के साथ ही कर्मचारियों के लिए मनोवैज्ञानिक सहयोग काफी अहम होता है. ऐसे दौर में, हम कोविड लहर के अलावा हम मानसिक स्वास्थ्य संकट की कई लहरों का सामना कर रहे हैं. एक क्षण के लिए हम जड़ हो सकते हैं, दूसरे पल उनमें भावनाओं का मिश्रण देखने को मिल सकता है. हर संकट के बाद समुदाय के प्रभावित होने से ऐसा होता है, जैसा कई शोध में बताया गया है. यही वजह है कि नीतिगत स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य के लिए संसाधन तैयार करना काफी अहम है.
(सौ:पीआईबी)