ज्ञानवापी में मिला शिवलिंग, याचिकाकर्ता का दावा; कोर्ट ने दिया इलाके को सील करने का आदेश

वाराणसी (TBN – The Bihar Now डेस्क)| सोमवार को वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी मस्जिद परिसर (Kashi Vishwanath Temple – Gyanvapi Mosque complex in Varanasi) के अदालत द्वारा आदेशित वीडियोग्राफी सर्वेक्षण का काम तीसरे दिन संपन्न हुआ. इस मामले में हिंदू याचिकाकर्ता सोहन लाल आर्य ने दावा किया कि सर्वेक्षण समिति को परिसर में एक शिवलिंग मिला.

मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए अदालत आयोग के साथ गए आर्य ने कहा कि उन्हें एक “निर्णायक सबूत” मिला है.

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सर्वेक्षण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से एक दिन पहले यह फैसला आया है. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ (Justice DY Chandrachud) की अध्यक्षता वाली एक पीठ मंगलवार 17 मई को अंजुमन इंतेजामिया मस्जिद समिति (Anjuman Intezamia Masajid Committee) की याचिका पर सुनवाई करेगी. हालांकि, तीन दिन लंबा सर्वेक्षण पूरा हो चुका है.

यहां मीडियाकर्मियों से बात करते हुए, आर्य ने कहा, “शिवलिंग … जिसकी नंदी प्रतीक्षा कर रहा थी … जैसे ही चीजें स्पष्ट हुईं, मस्जिद परिसर में ‘हर हर महावदेव’ के नारे गूंजने लगे.”

बता दें, मस्जिद अधिकारियों की आपत्तियों के बावजूद सर्वेक्षण जारी रखने के वाराणसी सिविल कोर्ट के आदेश के अनुसार सर्वेक्षण किया गया था.

सर्वेक्षण के समापन के बाद, वाराणसी की अदालत ने वाराणसी के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा को आदेश दिया, “जहां शिवलिंग पाया गया है, उस क्षेत्र को सील कर वहां लोगों को जाने से रोका जाए.”

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सील किए गए इलाके की सुरक्षा की जिम्मेदारी डीएम, पुलिस आयुक्त और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के कमांडेंट वाराणसी की होगी.

सिविल कोर्ट ने साइट का सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी करने के लिए एक अदालत आयुक्त की नियुक्ति की थी और इसे इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी, जिसने 21 अप्रैल को अपील को खारिज कर दिया था. उच्च न्यायालय के 21 अप्रैल के आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी गई थी.

पांच महिलाओं ने अदालत में याचिका दायर कर श्रृंगार गौरी मंदिर में दैनिक पूजा की अनुमति मांगी थी, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के अंदर स्थित है.

परिसर में सर्वेक्षण और वीडियोग्राफी करने के लिए सिविल कोर्ट का आदेश बाद में अदालत द्वारा दिया गया था.

एक अन्य याचिका, जिसे विजय शंकर रस्तोगी ने दायर किया था, ने तर्क दिया था कि पूरा परिसर काशी विश्वनाथ मंदिर का है और ज्ञानवापी मस्जिद, मंदिर परिसर का केवल एक हिस्सा है, यह भी 1991 से अदालत में लंबित है.

रस्तोगी ने यह भी दावा किया था कि काशी विश्वनाथ मंदिर दो हजार साल पहले बनाया गया था और मंदिर को मुगल सम्राट औरंगजेब ने ध्वस्त कर दिया था. वाराणसी में कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष सहायक आयुक्त एडवोकेट विशाल सिंह ने कहा कि सर्वे बिना किसी बाधा के किया गया.

वाराणसी के पुलिस आयुक्त, सतीश गणेश ने तीन दिवसीय सर्वेक्षण के दौरान काशी के लोगों को उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और कहा, “हमने सभी हितधारकों के साथ बात की और आम सहमति पर पहुंचे कि अदालत के आदेश का पालन करना महत्वपूर्ण है. हमने लोगों की गलतफहमी को भी दूर किया और उनको विश्वास में लेकर काम किया. आज तीन दिवसीय सर्वेक्षण समाप्त हो गया है.”