‘कैश फॉर जस्टिस’ मामले में फंसी सिर्फ छोटी मछलियां !

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| 15 नवंबर 2017 को एक निजी न्यूज चैनल पर पटना सिविल कोर्ट में व्याप्त भ्रष्टाचार पर आधारित ‘कैश फॉर जस्टिस’ स्टिंग मामले में पटना हाईकोर्ट द्वारा मंगलवार को 16 कर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है. भ्रष्टाचार में लिप्त इतनी बड़ी संख्या में कर्मियों की बर्खास्तगी पटना सिविल कोर्ट के इतिहास में पहली बार हुआ है.

उस न्यूज चैनल ने पटना सिविल कोर्ट के लगभग 30 कर्मियों द्वारा खुलेआम न्यायालय परिसर/कार्यालय में घूस मांगने और लेने का वीडियो दिखाया था. उसके बाद मामला पटना उच्च न्यायालय के संज्ञान में आने के बाद लगभग तीन वर्षों के बाद केवल 16 कर्मियों को दोषी मानते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है.

अब इस मामले में यह बात प्रमुखता से उठ रही है कि आखिर घूसखोरी के इस मामले में वीडियो में दिख रहे 30 लोगों में से सिर्फ 16 कर्मियों पर ही कार्यवाई क्यों हुई है. पटना हाई कोर्ट के वकील दिनेश सिंह का कहना है कि इस पूरे मामले में सिर्फ छोटी मछलियों को फंसाया गया है जबकि बड़ी मछलियों को अभी छोड़ दिया गया गया है.

एडवोकेट दिनेश सिंह के अनुसार, बिना बड़े अधिकारी की संलिप्तता के कोर्ट परिसर में खुलेआम घूसखोरी का खेल चल ही नहीं सकता है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से स्टिंग ऑपरेशन में कोर्ट मास्टर अर्थात पेशकार खुलेआम पैसों की मांग करता दिख रहा है, उससे तो यह साबित होता है कि इसमें कहीं न कहीं कोर्ट ऑफिसरों की भी मिली भगत हो सकती है.

दिनेश सिंह, एडवोकेट

दिनेश सिंह ने कहा कि चूंकि जूडिशल ऑफिसर के ऑर्डर से ही किसी को जेल भेजा जाता है, ऐसी स्थिति में उस ऑफिसर के पेशकार द्वारा अभियुक्त को किसी खास जेल में भेजने के लिए पैसों की मांग करना जूडिशल ऑफिसर के संज्ञान में न हो, ऐसा हो नहीं सकता है. इसका साफ मतलब है कि घूसखोरी का यह खेल जूडिशल ऑफिसर की जानकारी में चल रहा था.

बता दें कि पटना हाई कोर्ट के एडवोकेट दिनेश सिंह ने टीवी पर स्टिंग दिखाए जाने के बाद से लगातार इस मामले में ऐक्टिव रहे थे ताकि भ्रष्टाचारियों को सजा मिल सके. इसके लिए उन्होंने पटना हाईकोर्ट में पीआइएल (सिविल रिट पिटिशन नंबर 21341 / 2018) फाइल किया. दिनेश सिंह ने बताया कि उनके द्वारा फाइल इस पीआइएल में 14 जनवरी 2020 को जस्टिस शिवाजी पांडे और जस्टिस पार्थ सारथी के बेंच ने जजमेंट दिया था. बेंच ने अपने जजमेंट में कहा था, “हम यह व्यक्त कर सकते हैं कि स्टिंग ऑपरेशन 15.11.2017 को प्रसारित हुआ था और बहुत समय बीत चुका है. अब विभागीय कार्यवाही के दौरान सभी सामग्रियों को कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी) सहित, जिन्हें अगस्त 2019 में संबंधित व्यक्ति द्वारा प्रमाणिकता के प्रमाण-पत्र के साथ सौंपा गया है, एकत्र किया गया है. इस प्रकार, सभी सामग्री को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जाना चाहिए और यह न्यायालय माननीय मुख्य न्यायाधीश से एक आपराधिक मामला दर्ज करने के संबंध में निर्णय लेने का अनुरोध करता है.” (….we may express our view that the sting operation was broadcast on 15.11.2017 and much time has elapsed. Now all the materials have been collected in course of the departmental proceeding including the compact discs (CDs) which have been handed over in August, 2019 by the person concerned along with the certificate of genuineness. Thus, all the material should be placed before Hon’ble the Chief Justice and this Court requests Hon’ble the Chief Justice to take a decision accordingly with respect to lodging of a criminal case…).

आपको बताते चले कि घूसखोरी के इस मामले में सभी बर्खास्त 16 कर्मियों पर पटना पुलिस के द्वारा पीरबहोर थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है. अब मामले में पुलिस द्वारा इंवेस्टिगेशन किया जाएगा और दोषियों को जेल भेजा जाएगा.