एक बार फिर भगवान और भक्त के बीच बढ़ी दूरियां, महाबोधि मंदिर को किया गया बंद

सरकारी आदेश के बाद विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर को किया गया बंद
हिमालय क्षेत्र से आए बौद्ध श्रद्धालु मंदिर के बाहर कर रहे हैं विशेष पूजा
विश्व शांति और संसार को कोरोना से मुक्ति की कर रहे हैं कामना

बोधगया (TBN – The Bihar Now डेस्क)| पूरे देश में बढ़ रहे कोरोना संक्रमण (Covid-19) ने एक बार फिर लोगों के नॉर्मल जीवन को अस्त-व्यस्त करना शुरू कर दिया है. बिहार भी इससे अछूता नहीं है. महामारी की तीसरी लहर (Third wave of Corona) में कोरोना संक्रमितों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए बिहार सरकार (Government of Bihar) के द्वारा नए गाइडलाइंस जारी किया गया है.

नए गाइडलाइंस के तहत राज्य के सभी धार्मिक स्थलों को बंद (All religious places closed due to Corona pandemic) कर दिया गया है. इससे कोरोना के कारण एक बार फिर भगवान और भक्त में दूरियां बढ़ गई है. इसी कड़ी में गुरुवार से बोधगया स्थित विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर परिसर (Bodh Gaya Mahabodhi Mandir) को भी बंद कर दिया गया है. हालांकि महाबोधि मंदिर में हर दिन की तरह सुबह 5 बजे और शाम 6 बजे भिक्षुओं द्वारा सुत्तपाठ (Sutt Path) किया जाता रहेगा. इसमें थेरावाद (Theravada) व महायान (Mahayana) परंपरा के बौद्ध भिक्षु व लामा होंगे.

अब आगामी 21 जनवरी तक कोई श्रद्धालु इस मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेंगे. जानकारी के मुताबिक इस मंदिर में भगवान बुद्ध को अर्पित की जाने वाली खीर हर दिन सुबह 10:00 बजे चढ़ाई जाएगी और सुरक्षाकर्मियों सहित अन्य कर्मचारियों की मंदिर में आवाजाही लागू रहेगी.

मालूम हो कि विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर पूरे दुनिया के लोगों के लिए आस्था का एक महत्वपूर्ण केंद्र है. इसी मंदिर परिसर में पवित्र बोधिवृक्ष भी अवस्थित है जिसके नीचे हजारों साल पहले भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था.

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इन दिनों हिमालय क्षेत्र से काफी श्रद्धालु बोधगया पहुंचे हुए हैं जिनके द्वारा भगवान बुद्ध की विशेष पूजा आयोजित की जा रही थी. परंतु मंदिर बंद होने के कारण ये श्रद्धालु काफी मायूस हैं. मंदिर में प्रवेश बंद होने के कारण अब ये लोग मंदिर परिसर के बाहर बैठकर पूजा अर्चना और साधना कर रहे हैं.

लद्दाख से आए श्रद्धालुओं ने बताया कि वे लोग मंदिर बंद हो जाने से काफी दुखी है परंतु कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते सरकार के निर्णय के साथ हैं. अब वे लोग बाहर बैठकर ही भगवान बुद्ध की पूजा अर्चना कर रहे हैं.