पर्यावरण दिवस पर एनटीपीसी बाढ़ का पौधारोपण अभियान, ली पर्यावरण संरक्षण की शपथ

पर्यावरण दिवस पर एनटीपीसी पूर्वी क्षेत्र की सभी परियोजनाओं में चलाया गया वृहद पौधारोपण अभियान
बाढ़ परियोजना ने आसपास के क्षेत्रों में चलाया 1000 फलदायक पेड़ों का किया पौधारोपण अभियान

बाढ़ (TBN – अखिलेश्वर कु सिन्हा की रिपोर्ट)| शनिवार को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एनटीपीसी बाढ़ परियोजना (NTPC Barh)द्वारा पौधारोपण अभियान चलाया गया. बाढ़ टाउनशिप के पार्क परिसर में कार्यकारी निदेशक प्रेम प्रकाश के साथ वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और परिवारजनों ने मिलकर कुल 50 फलदायक पौधे लगाए और साथ ही पर्यावरण संरक्षण की ओर सजगता से काम करने की शपथ ली.

इसके अलावा पर्यावरण प्रबंधन समूह द्वारा लेमुआबाद में 1000 फलदायक पेड़ों का पौधारोपण किया जा रहा है. साथ ही आर ऐंड आर विभाग द्वारा सहरी पंचायत के सामुदायिक भवन में पौधारोपण कार्यक्रम की योजना बनाई गई है.

पर्यावरण अनुकूल बिजली उत्पादन करते हुए देश की सबसे बड़ी बिजली कंपनी – एनटीपीसी ने विगत वर्षों में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं.

शनिवार को विश्व पर्यावरण दिवस के दिन जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, देश की सबसे बड़ी बिजली कंपनी एनटीपीसी निम्न प्रकार से बिहार के उद्योगों और लाखों ज़िंदगियों को रोशन कर रही है:-

आधुनिक प्रौद्योगिकी से कुशल और प्रदूषण-मुक्त बिजली उत्पादन

विज्ञप्ति के अनुसार, बिहार में एनटीपीसी की स्थापित कुल बिजली उत्पादन क्षमता 6810 मेगावॉट है. राज्य की औद्योगिक आवश्यकताओं को पूरा करते हुए यहाँ एनटीपीसी ने कुल 6 प्लांट स्थापित किए हैं जिनकी कुछ यूनिट निर्माणाधीन है. इन सभी संयंत्रों के उत्पादन आंकड़े मिला लिए जाएं तो पीक डिमांड पर बिहार को हर दिन 4000 से भी अधिक मेगावॉट बिजली आपूर्ति एनटीपीसी के विभिन्न संयंत्रों द्वारा की जा सकती है.

इस विज्ञप्ति में बताया गया है कि एनटीपीसी बाढ़ में पर्यावरण अनुकूल सुपर क्रिटिकल प्रौद्योगिकी से वर्तमान में 1320 मेगावॉट उत्पादन किया जा रहा है. इससे आम सब-क्रिटिकल संयंत्रों के मुक़ाबले यहाँ प्रतिवर्ष सैकड़ों मीट्रिक टन कोयले की बचत हो रही है. एनटीपीसी ने सर्वप्रथम पहल करते हुए देश में नई व उन्नत प्रौद्योगिकी आधारित सुपर क्रिटिकल व अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल विद्युत सयंत्रों को स्थापित किया है. हाल में छत्तीसगढ़ में एक अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल प्लांट भी एनटीपीसी ने देश को समर्पित किया है.

एफजीडी प्रौद्योगिकी निर्माणाधीन, भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी

विज्ञप्ति में आगे बताया गया है कि भारत में बिजली की सर्वाधिक आपूर्ति कोयला आधारित संयंत्र करते हैं. इसके साथ ग्रिड फ्रिक्वेन्सी के स्थायित्व और बिजली मांग की त्वरित आपूर्ति करने में भी पारंपरिक ऊर्जा स्रोत सबसे अधिक कारगर होते हैं. लेकिन भविष्य में प्राकृतिक स्रोतों से उत्पादन बढ़ाने के लिए एनटीपीसी ने एक दूरगामी योजना बनाई है.

भारत सरकार की अक्षय ऊर्जा नीति के मुताबिक कंपनी ने वर्ष 2032 तक कुल 32 गीगावॉट उत्पादन नवीकरणीय स्रोतों से करने का लक्ष्य रखा है. अक्षय ऊर्जा के लिए समर्पित कंपनी NREL को पिछले वर्ष अक्तूबर में ही पंजीकृत कर लिया गया था और तब से इलेक्ट्रिक वाहनों और सोलर रूफटॉप जैसी कई पहलें बड़े स्तर पर शुरू की गई हैं. विज्ञप्ति में बताया गया है कि बिहार के बाढ़ सुपर थर्मल स्टेशन में टाउनशिप के स्कूल में सोलर रूफ़टॉप से 100 किलोवॉट सौर ऊर्जा का उत्पादन हाल में शुरू किया गया है.

इसके बावजूद मौजूदा परिस्थितियों में एनटीपीसी के जितने भी संयंत्र हैं, उनमें केंद्रीय प्रदूषण नियामक बोर्ड और मुख्य न्यायालय के दिशानिर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है. एनटीपीसी बाढ़ में परिवेशीय वायु की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जाती है. साथ ही परिजोयना ने भारतीय कंपनी BHEL के साथ अपनी सभी इकाइयों के लिए एफजीडी इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. जिससे आने वाले दिनों में पर्यावरण संरक्षण के राष्‍ट्रीय मानकों के अनुपालन में यह सहायक सिद्ध होगा.

सड़क और राजमार्ग निर्माण के लिए राख़ का ऑक्शन, बाढ़ परियोजना ने वित्तीय वर्ष 20-21 में किया 108 प्रतिशत राख़ उपयोगिकरण

विज्ञप्ति में बताया गया है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के साथ कुशल साझेदारी करते हुए एनटीपीसी प्रतिवर्ष अधिकतम राख़ उपयोगीकरण का ध्येय हासिल कर रही है. बिहार के प्रमुख हाइवे – पटना – बख्तियारपुर फोरलेन, पटना रिंग रोड, मुजफ्फरपुर – दरभंगा सहित अनेक स्टेट हाइवेज़ में एनटीपीसी द्वारा प्रदत्त राख़ का उपयोग किया जा रहा है. ऐसे कई वैज्ञानिक प्रमाण हैं यह साबित करते हैं कि राख़ के उपयोग से निर्मित सड़कें मजबूत और टिकाऊ होती हैं. सड़कों के अलावा बड़े भवनों की निर्माण ईंटों में और यहाँ तक कि खेती में भी कुछ फसलों में राख़ के उपयोग से पैदावार में वृद्धि की संभावनाएं हैं. इन संभावनाओं को वृहद स्तर पर तलाशने की ज़रूरत है.

ज़ीरो लिक्विड डिस्चार्ज – जल मानकों का अनुपालन

विज्ञप्ति के मुताबिक, पर्यावरण संरक्षण की ओर आधुनिक पहलें करने के साथ ही एनटीपीसी के सभी 6 प्लांट, बिहार में सजगता से तय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित कर रहे हैं. ये संयत्र जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) का अनुपालन करते है यानि किसी भी तरह के अपशिष्ट जल को संयत्र के बाहर नहीं छोड़ा जाता है. “यह एक ऐसी उपचार प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य अपशिष्ट जल के उचित ट्रीटमेंट से स्वच्छ पानी का उत्पादन करना है जो पुन: उपयोग के लिए उपयुक्त होता है. इससे पानी की खपत में काफी अधिक कमी आती है, जिससे पैसे की बचत होती है और पर्यावरण के लिए भी ये फायदेमंद होता है. ZLD सिस्टम लगभग सभी उत्पादित अपशिष्ट जल को शुद्ध और दोबारा उपयोग में लाने के लिए विभिन्न तरह की उन्नत तकनीकों को नियोजित करता है”.

ग्रामीण क्षेत्रों में भारी वर्षा के दिनों में होने वाले जलजमाव के कारण रिसाव की आशंका जागती है. लेकिन एनटीपीसी के संयंत्रों से कोई भी जल अपशिष्ट आसपास के क्षेत्रों में नहीं छोड़ा जाता है. आपातकालीन स्थिति जैसे बाढ़ से बचाव के लिए भी एक बेहद कुशल ड्रेनेज सिस्टम की व्यवस्था बनाई जाती है.

कचरा प्रबंधन की बात करें तो बाढ़ टाउनशिप से निकला घरेलू कचरा अपशिष्ट वर्मीकंपोस्ट खाद बनाने में प्रयुक्त किया जाता है. विगत समय में परियोजना के आसपास के क्षेत्रों की 25 ग्रामीण महिलाओं को वर्मीकंपोस्ट खाद बनाने का प्रशिक्षण दिया गया था, जिससे प्रेरणा लेते हुए दो महिलाओं ने घरेलू स्तर पर खाद उत्पादन की सकारात्मक पहल शुरू कर दी है. इसमें परियोजना में उत्पादित खाद का वितरण भी किया गया था.

युद्धस्तर पर हो रहा पौधारोपण, लौटने लगे घुमंतू पक्षी

बिहार और झारखंड में एनटीपीसी की सभी परियोजनाओं द्वारा प्लांट, आवासीय और आसपास के क्षेत्रों में लाखों की संख्या में पेड़ लगवाए गए हैं. यह एनटीपीसी के वृहद पौधारोपण अभियान का नतीजा है कि जहां भी एनटीपीसी की परियोजनाएँ अवस्थित हैं, वहाँ हमेशा एक रमणीय प्राकृतिक वातावरण शोभायमान रहता है. विगत वर्षों में एनटीपीसी बाढ़ ने पीपल, बरगद, नीम, जामुन, करंज, कदम, अमलतास जैसे कई पेड़-पौधे अपने आसपास के क्षेत्रों में लगवाए हैं.

पूर्व में जो घुमंतू पक्षी लगातार बढ़ते तापमान के कारण विलुप्त होते जा रहे थे, एनटीपीसी के हरे-भरे कैंपस में उनकी चहक भी लौटने लगी है. इस प्रकार एनटीपीसी की सभी परियोजनाएं, औद्योगिक विकास के ध्येय को पूरा करते हुए, पर्यावरण संरक्षण की ओर अपने दायित्वों को ज़िम्मेदारी से निभा रही हैं.