किसानों को कृषि विज्ञान केन्द्र से जोड़ने की जरूरत – कृषि मंत्री

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| अमरेन्द्र प्रताप सिंह, मंत्री कृषि, सहकारिता एवं गन्ना उद्योग विभाग ने शुक्रवार को कृषि विभाग के अंतर्गत भूमि संरक्षण निदेशालय तथा उद्यान निदेशालय द्वारा कार्यान्वित योजनाओं की समीक्षा की.

मंत्री कहा कि जिन किसानों के लिए कार्य किया जा रहा है, उन्हें यह महसूस हो कि सरकार एवं पदाधिकारी हमारे लिए कुछ कर रहें हैं, तो यह विभाग के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी. उन्होंने निदेश दिया कि बिहार के किसानों को किस प्रकार से संबंधित कृषि विज्ञान केन्द्र से जोड़ा जाये, इस पर कार्रवाई करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि किसान खेती को मुख्य पेशा के रूप में नहीं अपना रहे हैं, जिससे उनको उचित आमदनी नहीं प्राप्त हो रही है. किसानों को कृषि को मुख्य पेशा के रूप में अपनाने हेतु उन्हें कृषि विज्ञान केन्द्रों से संबद्ध किया जाये.

मंत्री ने कहा कि भूमि संरक्षण निदेशालय के अन्तर्गत स्वीकृत कुल 180 पदों के विरूद्ध 140 पद रिक्त है. इन रिक्त पदों को अविलम्ब भरने की कार्रवाई की जाये. गणेश कुमार, निदेशक, भूमि संरक्षण द्वारा भूमि संरक्षण निदेषालय के प्रमुख कार्यों के क्रम में बताया गया कि वर्षा जल को संरक्षित कर बरसात के बाद उस जल से सिंचाई एवं पेयजल आदि के रूप में उपयोग करना प्रमुख भूमि संरक्षण निदेशालय का कार्य है. साथ ही, विभिन्न संरचनाओं यथा चेकडैम, तालाब, आहर आदि संरचनाओं का निर्माण एवं जीर्णोद्धार कर भूमि एवं जल का संरक्षण तथा सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराकर किसानों के फसलों की उत्पादकता एवं उत्पादन में वृद्धि लाना है.

कृषि मंत्री द्वारा समीक्षा के क्रम में निदेश दिया गया कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-जलछाजन विकास- जो दक्षिणी बिहार के 8 जिलों यथा बाँका, जमुई, मुंगेर, नवादा, गया, कैमूर, औरंगाबाद एवं रोहतास जिलों में चलाई जा रही है, इसे दक्षिणी बिहार के सभी जिलों में कार्यान्वयन के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार से अनुरोध किया जाये. साथ ही, बिहार के सभी 38 जिलों में भूमि संरक्षण के कार्यों को करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का निदेश दिया गया.

कृषि मंत्री ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- जलछाजन विकास अन्तर्गत रोहतास जिला की उपलब्धि 36.89 %, औरंगाबाद की उपलब्धि 41.38 % तथा बाँका जिला का उपलब्धि 49.85 % है. उन्होंने निदेश दिया गया कि योजनाओं का कार्यान्वयन ससमय करते हुए किसानों तक पहुंचाया जाये तथा शत-प्रतिशत राशि भी व्यय किया जाये.

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना- प्रतिबूंद अधिक फसल तथा राष्ट्रीय कृषि विकास योजनान्तर्गत पूर्वी भारत के लिए हरित क्रांति योजना एवं राज्य योजनान्तर्गत कार्यान्वित भूमि एवं जल संरक्षण की योजना में उपलब्ध अवशेष राशि को कार्य योजना बनाकर कार्यान्वित किया जाये, ताकि वह किसानों तक पहुँच सके.

उन्होंने निदेश दिया कि चेक डैम आदि संरचनाओं के निर्माण स्थल के बगल में अतिरिक्त पानी को रिचार्ज वेल (सोख्ता) बनाकर उसमें अधिक पानी को बहने से रोक कर उसी में पानी बहाया जाये, ताकि भू-जल स्तर में सुधार हो सके.

इस बैठक में डॉ एन सरवण कुमार, सचिव, कृषि विभाग, नन्द किशोर, निदेशक, उद्यान, गणेश कुमार, निदेशक, भूमि संरक्षण सहित अन्य विभागीय पदाधिकारीगण भी उपस्थित थे.

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