जज को दी गई अनिवार्य सेवानिवृति, मामला पप्पू यादव को हथकड़ी में कोर्ट में पेश करने का

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| नीतीश कैबिनेट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. वैसे तो इस बैठक में 21 एजेंडों पर मुहर लगी लेकिन बड़ी खबर यह है कि बेगूसराय के मंझौल अनुमंडल न्यायालय की पूर्व एसीजेएम संगीता रानी को अनिवार्य सेवानिवृति दे दी गई है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की इस बैठक में एसीजेएम संगीता रानी को जबरन रिटायरमेंट देने के प्रस्ताव पर मुहर लगी है. बता दें, लगभग तीन साल पहले पटना हाईकोर्ट ने संगीता रानी को सस्पेन्ड किया था. संगीता रानी पर उनके पटना पदस्थापना के दौरान कदाचार का आरोप लगा था जिसपर जांच के बाद हाई कोर्ट ने उन्हें सस्पेन्ड किया था. सस्पेंशन अवधि में उनका मुख्यालय पटना था.

मामला यह है कि 4 साल पहले जब संगीता रानी पटना में पदस्थापित थी तब उनके कोर्ट में सांसद पप्पू यादव को हाजिर किया गया था. उस वक्त पटना पुलिस ने मधेपुरा सीट से तत्कालीन सांसद को हथकड़ी में ही कोर्ट में पेश किया था. पप्पू यादव ने उनको हथकड़ी लगा कर कोर्ट में पेश करने पर अपनी आपत्ति जताई थी.

उस वक्त कोर्ट ने भी पटना पुलिस को इसके लिए फटकार लगाई थी. पटना के तत्कालिक सीनियर एसपी मनु महाराज ने एसआई प्रदीप, एएसआई जमालुद्दीन और नौ कांस्टेबल को निलंबित किया था. इन सभी पुलिसकर्मियों की तैनाती बेऊर जेल से आनेवाली गाड़ी और कोर्ट की सुरक्षा को लेकर की गई थी.

बता दें, बेउर जेल से पप्पू यादव को कोर्ट ले जाने के बाद गाड़ी से उतरते ही सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें हथकड़ी पहना दी और उसके बाद संगीता रानी की अदालत में पेश किया था. कोर्ट ने सांसद को हथकड़ी में देखकर पुलिसवालों को काफी फटकार लगी थी.

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हथकड़ी पहन कर सांसद को कोर्ट में पेश करने का यह मामला काफी तूल पकड़ लिया था. पप्पू यादव की पत्नी रंजीत रंजन, जो खुद एक सांसद थी, ने इस मामले को संसद में उठाया था. फिर इस मामले में लोकसभा की तत्कालीन अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने बिहार सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी.

दूसरी ओर, सांसद पप्पू यादव ने भी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी पत्र लिखा था. पत्र के माध्यम से उन्होंने दोषी पुलिसकर्मियों को दंडित करने की मांग की. उसके बाद पटना पुलिस द्वारा एक दारोगा सहित 11 पुलिसकर्मियों पर कार्यवाई करते हुए निलंबित कर दिया गया था.