किसान आंदोलन: 8 दिसम्बर को भारत बंद का ऐलान

नई दिल्ली / पटना (TBN -The Bihar Now डेस्क)| नये कृषि कानून को लेकर किसानों का “दिल्ली चलो मार्च अभियान” चल रहा है. किसानों का यह आंदोलन पिछले दो महीनों से चल रहा है और अब किसान पिछले कई दिनों से दिल्ली के बोर्डर पर बैठे हुए हैं.

इस आंदोलन को खत्म करने के लिए शनिवार को केंद्र सरकार और किसानों के बीच पांचवें दौर की वार्ता होगी. इधर नए कृषि कानूनों को पूरी तरह रद करने के लिए दबाव बढ़ाते हुए किसानों ने आठ दिसंबर को भारत बंद का ऐलान किया है.

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केंद्र सरकार के साथ अब तक हुए चार दौर की बातचीत के बाद शुक्रवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने दबाव की रणनीति का दांव खेला है. सिंघु बॉर्डर पर आयोजित प्रेस वार्ता में किसान नेताओं ने कहा कि वे तीनों कानूनों के रद्द होने के बाद ही आंदोलन को समाप्त करेंगे. उन्होंने कहा कि उन्हें इस आंदोलन में देश के विभिन्न ट्रेड यूनियनों का समर्थन प्राप्त है.

इधर गुरुवार को हुई बैठक के बाद किसान संगठन की ओर से कहा गया कि केंद्र सरकार ने नए कृषि कानूनों में बिजली व पराली को लेकर किए गए प्रावधानों को वापस लेने व न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानून बनाने पर सकारात्मक संकेत दिया है. लेकिन किसान संगठन के अनुसार सरकार से उन्होंने मांग की है कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर कृषि कानूनों को वापस ले. इससे कम पर किसी भी सूरत में किसान मानने वाले नहीं हैं.

किसान आंदोलन के कार्यक्रम

किसान नेता युद्धवीर सिंह, मोर्चा के सदस्य योगेंद्र यादव, बलदेव सिंह, बूटा सिंह फूल की मौजूदगी में लखोवाल ने कहा कि पांच दिसंबर को किसान देशभर में मोदी सरकार व कॉरपोरेट घरानों का पुलता फूंकेंगे. सात दिसंबर को जिन लोगों को केंद्र सरकार से पुरस्कार मिले हैं, वे उसे वापस कर आंदोलन का समर्थन करेंगे. इसके साथ ही आठ दिसंबर को पूरा भारत बंद रहेगा.

उन्होंने कहा कि इसके बाद टोल प्लाजा को भी एक दिन के लिए फ्री कराया जाएगा. हालांकि इसके लिए उन्होंने निर्धारित दिन नहीं बताया. बंगाल से आए पूर्व सांसद व ऑल इंडिया किसान सभा के नेता हनन्न मौला ने कहा कि शनिवार को केंद्र के साथ होने वाली बैठक में कृषि कानूनों में संशोधन पर बात नहीं बनेगी, क्योंकि पूरा कानून सिर से लेकर पैर तक सड़ा हुआ है. केंद्र सरकार को इसे वापस लेना ही होगा.

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