बड़ी खबर: देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी नहीं रहे

नई दिल्ली ( TBN – the bihar now डेस्क) | बड़ी खबर नई दिल्ली से आ रही है जहां आर्मी अस्पताल में देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का निधन हो गया है. प्रणब मुखर्जी का दिल्ली के सैन्य अस्पताल में मस्तिष्क की सर्जरी हुई थी. ब्रेन सर्जरी की प्रक्रिया से पहले COVID-19 टेस्ट में वे पाज़िटिव पाए गए थे. उनके मस्तिष्क में एक थक्का को हटाने के लिए सेना के अनुसंधान और रेफरल अस्पताल में सर्जरी की गई थी. वे 84 वर्ष के थे.

उनके बेटे और पूर्व सांसद अभिजीत मुखर्जी ने एक ट्वीट में इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा है “हेवी हार्ट के साथ, यह आपको सूचित करना है कि मेरे पिता श्री प्रणव मुखर्जी का निधन आरआर अस्पताल के डॉक्टरों के सर्वोत्तम प्रयासों; पूरे भारत में लोगों से प्रार्थना, दुआ; के बावजूद हो गया है. मैं आप सभी का धन्यवाद करता हूँ”.

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने COVID-19 टेस्ट में पाज़िटिव आने के बाद एक ट्वीट किया था: “एक अलग काम के लिए अस्पताल जाने पर, आज COVID-19 टेस्ट में मैं पाज़िटिव आया हूँ. जो पिछले सप्ताह मेरे साथ संपर्क में आए, स्वयं को अलग-थलग करने और COVID​​-19 का परीक्षण करने के लिए मैं उन लोगों से अनुरोध करता हूं.”

प्रणब मुखर्जी एक भारतीय राजनेता थे जिन्होंने 2012 से 2017 तक भारत के 13 वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया. वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में वरिष्ठ नेता रहे हैं. अपने राष्ट्रपति पद से पहले, वह 2009 से 2012 तक केंद्रीय वित्त मंत्री थे.

प्रणब मुखर्जी (11 दिसंबर 1935 – 31 अगस्त 2020) एक भारतीय राजनेता थे जिन्होंने 2012 से 2017 तक भारत के 13 वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया. पाँच दशकों के राजनीतिक जीवन में, मुखर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में एक वरिष्ठ नेता रहे और भारत सरकार में कई मंत्रिस्तरीय विभागों में भी पदस्थापित रहें. राष्ट्रपति के रूप में चुनाव से पहले, मुखर्जी 2009 से 2012 तक केंद्रीय वित्त मंत्री थे. उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, 2019 में भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया था.

मुखर्जी को राजनीति में 1969 में तब ब्रेक मिला जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें कांग्रेस के टिकट पर भारत की संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा के लिए चुने जाने में मदद की. इसके बाद, वे 1973 में गांधी के सबसे भरोसेमंद लेफ्टिनेंट और उनके मंत्रिमंडल में एक मंत्री बने. 1975–77 के विवादास्पद आंतरिक आपातकाल (Internal Emergency ) के दौरान, उन पर (कई अन्य कांग्रेस नेताओं की तरह) घोर ज्यादती करने का आरोप लगाया गया. 1982 में भारत के वित्त मंत्री के रूप में मुखर्जी की कई मंत्रालयों की सेवा का समापन उनके पहले कार्यकाल में हुआ. वह 1980 से 1985 तक राज्यसभा में सदन के नेता भी रहे.

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