ब्रेकिंग: मुज़फ़्फ़रपुर में योग गुरु रामदेव पर दर्ज हुआ कोर्ट परिवाद

मुज़फ़्फ़रपुर (TBN – The Bihar Now डेस्क)| बुधवार को सीजेएम, मुजफ्फरपुर की कोर्ट में योग गुरु स्वामी रामदेव पर विभिन्न धाराओं सहित आपदा अधिनियम के तहत परिवाद (Complaint case) दर्ज हुआ है. एडवोकेट ज्ञान प्रकाश ने यह कोर्ट परिवाद दर्ज कराया है.

एलोपैथी डॉक्टरों के खिलाफ बयान देने पर एडवोकेट ज्ञान प्रकाश ने योग गुरु पर महामारी एक्ट के अलावा धोखाधड़ी और देशद्रोह की धाराओं में शिकायत दर्ज करवाई है. इस मामले की सुनवाई आगामी 7 जून को होगी. केस की फ़ाइलिंग संख्या क्रिमिनल परिवाद केस 2397/2021 (Cr Case Complaint No. P-2397/2021) है. यह परिवाद 268, 152(A), 186 , 269, 270, 336, 420, 400, 124(B), 500, 505/511 एवम 36 (2)(i) महामारी और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 54 की धाराओं के अंतर्गत फाइल किया गया है.

परिवाद पत्र में एडवोकेट ने आरोप लगाया है कि पिछले 21 मई को पतंजलि विश्वविद्यालय एवं शोध संस्थान के संयोजक स्वामी रामदेव ने अलग-अलग न्यूज टीवी चैनलों पर एलोपैथी चिकित्सा विज्ञान पर अमर्यादित टिप्पणी की थी. इसके साथ ही उन्होंने कोरोना से डॉक्टरों की मौत का मजाक भी उड़ाया था.

परिवाद पत्र में कहा गया है कि बाबा रामदेव ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए किए जा रहे टीकाकरण अभियान का भी मजाक उड़ाया है. साथ ही लोगों में टीकाकरण को लेकर जारी भ्रम को बढ़ावा दिया है. इस परिवाद को न्यायालय ने स्वीकार करते हुए सुनवाई के लिए 7 जून की तारीख तय की है.

परिवादी ने स्वामी रामदेव को एक परम सम्माननीय व्यक्ति बताते हुए कहा है कि स्वामी के व्यक्तित्व का प्रभाव जनमानस पर व्यापक रूप से पड़ता है. ऐसी स्थिति में उनके माध्यम से एक संदेश फैलाया जाता है कि एलोपैथिक दवाई लेने से महामारी काल में लाखों की संख्या में मरीजों की मौत हुई है. ऐसा कर रामदेव ने लोगों में एलोपैथी चिकित्सा के खिलाफ भ्रम फैलाने का अपराध पूर्ण कार्य किया है जिससे सामान्य जनमानस एलोपैथिक चिकित्सा के प्रति भय होगा और उनके स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ेगा.

परिवादी ने आगे कहा है कि एक ओर जहां आए दिन एलोपैथिक डॉक्टरों को जन आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है ऐसे में अभियुक्त स्वामी रामदेव, जिनके लाखों-करोड़ों अनुयाई हैं, के माध्यम से किया गया कोई भी टिप्पणी जनमानस को और भ्रमित कर उन्हें डॉक्टरों के प्रति उत्तेजित कर उनके लिए जानलेवा बना सकती है. ऐसी आपातकालीन परिस्थिति में अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों की पूर्ति के लिए जनमानस को दुष्ट प्रेरित करने का कार्य बाबा रामदेव द्वारा किया गया है जो कि समाज और राष्ट्र के हित में नहीं है.

परिवाद पत्र में लिखा गया है कि कुछ दिनों पहले रामदेव द्वारा यह कहा गया कि टीका लगाकर भी 1000 डॉक्टर की मृत्यु हुई है जिसने जनमानस को एलोपैथिक चिकित्सा से जुड़े स्वास्थ्य कर्मियों के विरुद्ध उत्प्रेरित किया है.

परिवादी द्वारा स्वामी रामदेव से ये मांगे की गई हैं

परिवादी ने कहा है कि रामदेव द्वारा मुजफ्फरपुर में 500 बेड का सभी सुविधाओं से लैस आयुर्वेदिक अस्पताल का निर्माण कराया जाए जिसमें इलाज प्रक्रिया सरल एवं मुफ्त हो. साथ ही परिवादी ने मांग की है कि अभियुक्त रामदेव के माध्यम से उस अस्पताल के सभी शिक्षक, चिकित्सक तथा कर्मियों को मानदेय का भुगतान हो. यदि रामदेव ऐसा करने में असमर्थ होते हैं तो उनके द्वारा 2500 करोड़ रुपये की राशि मुजफ्फरपुर जिलाधिकारी को जिला के चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रदान करना होगा जिससे यह सिद्ध हो सके कि रामदेव स्वामी की योजनाएं व्यापारिक नहीं बल्कि समाज सेवा के लिए है.

आम जनता के बीच भ्रम फैलाया है

परिवादी ने रामदेव पर आरोप लगाया है कि रामदेव द्वारा एलोपैथी को एक स्टुपिड एवं दिवालिया साइंस बताया गया है. रामदेव द्वारा एलोपैथी चिकित्सा को कोरोना वायरस से हुई मौतों का जिम्मेवार बताया है. साथ ही उनके द्वारा कोरोना महामारी से लोगों को बचाने के लिए कार्य कर रहे डॉक्टर एवं कर्मियों के विरुद्ध गलत बयान बाजी कर आम जनता के बीच भ्रम फैलाने का काम किया गया है. परिवादी ने कहा है कि इससे डॉक्टर एवं कर्मियों का अपमान हुआ है तथा यह देश के साथ गद्दारी है. स्वामी रामदेव द्वारा इस तरह देशद्रोह का कार्य किया है.

बता दें कि एलोपैथ दिए गए स्वामी रामदेव के कथित विवादित बयान पर मंगलवार को डॉक्टरों ने विरोध में काला बिल्ला लगाकर काम किया. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि एलोपैथी के डॉक्टरों ने कोरोना की इस घड़ी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है. रामदेव का बयान चिकित्सकों को आहत करता है. बता दें कि विवादित बयान पर डॉक्टरों ने स्वामी रामदेव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.