जिस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए थे सीएम, अब एकाधिकार को लेकर जुबानी जंग

बख्तियारपुर (TBN – अखिलेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट)| चंद महीने पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पैतृक शहर बख्तियारपुर में जिस वेंकटेश्वरनाथ मंदिर-सह-ठाकुरबाड़ी के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में उपस्थित हुए थे, उसी ठाकुरबाड़ी पर अब तथाकथित एकाधिकार को लेकर दो पक्षों के बीच जंग छिड गयी है. दोनों ही पक्षों द्वारा एक दूसरे पर ठाकुरबाड़ी की करोडों की संपत्ति पर कब्जा करने का आरोप लगाया जा है.

बता दें, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बख्तियारपुर स्थित पैतृक घर के ठीक पीछे बने इस वेंकटेश्वरनाथ मंदिर सह ठाकुरबाड़ी के पास कई एकड़ की जमीन है. स्थानीय श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा यहां एक भव्य राधेकृष्ण मंदिर का भी निर्माण कराया गया. इस मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में गत नबंवर 2020 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुद शामिल हुए थे.

यह वेंकटेश्वरनाथ मंदिर कई दशकों से बख्यिारपुर में स्थापित है. वहीं ठाकुरबाड़ी परिसर में भव्य राधाकृष्ण के मंदिर का निर्माण भी कराया गया हैं. इसी जगह कम्युनिटी हाल का भी निर्माण कराया गया. लेकिन हाल के दिनों में इस मंदिर के पुजारी और मंदिर कमिटी के सदस्यों के बीच कथित जारी जुबानी जंग ने नई बहस छेड़ दी है.

ठाकुरबाड़ी, धार्मिक न्यास परिषद के अधीन

बताया जाता है कि यह ठाकुरबाड़ी, धार्मिक न्यास परिषद के अधीन आता है. न्यास परिषद के द्वारा इसके संचालन के लिए एक कमिटी का निर्माण कराया गया है, जिसके अध्यक्ष बाढ़ के एसडीएम है.

वहीं कमिटी में मठ के पूर्व महंत सह पुजारी के अलावे दूसरे पक्ष के भी कई लोग शामिल किये गये हैं. वावजूद इसके दोनों पक्ष एक दूसरे पर मठ पर एकाधिकार और स्वामित्व बनाने का आरोप लगा रहे हैं.

हकीकतपुर निवासी जनार्दन शर्मा का आरोप है कि यह ठाकुरबाड़ी धार्मिक न्यास परिषद के अधीन आता है. वे लोग परिषद के नियमों को मानते हैं. लेकिन ठाकुरबाड़ी में वर्षों से रह रहे पुजारी किसी भी कमिटी को नहीं मानते हैं. वे अपने मर्जी से मठ का संचालन करते है.

शर्मा ने कहा कि जहां मठ की जमीन का रसीद नियमतः वेंकटेश्वरनाथ मंदिर के नाम से कटाया जाना चाहिये, वहां पुजारी सारी जमीन की रसीद अपने नाम से कटाकर इसमें कब्जा करने का स्वांग कर रहे है. साथ ही मठ के अंदर असामाजिक तत्वों का जमावडा भी लग रहा है.

दूसरी ओर मठ में 1999 से पुजारी का काम देख रहे दीना जी इन आरोपों से सिरे से नकारते हुए कहते हैं कि कुछ लोगों ने उन्हें धोखे में रखकर ठाकुरबाड़ी परिसर में मंदिर और सामुदायिक हाल का निर्माण करा दिया. पुजारी ने आरोप लगाया है कि अब वे ही लोग उसपर निजी कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका वे लगातार विरोध कर रहे हैं.

पुजारी का कहना है कि वे लोग ठाकुरबाड़ी परिसर का व्यावसायिक उपयोग करना चाहते हैं. जब उन्होंने इसका विरोध किया तब वे लोग उन्हें ही ठाकुरबाडी से हटाने की साजिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि वे धार्मिक न्यास परिषद को मानते हैं और परिषद के निर्देश के अनुसार ही काम करेंगें.

बताते चलें, यह मंदिर धार्मिक न्यास परिषद के अधीन आता है. ऐसे में न्यास द्वारा गठित कमिटि का अध्यक्ष सरकारी अधिकारी होते हैं. लेकिन दोनों पक्षों की दलील और आरोप प्रत्यारोप के बीच सरकारी स्तर पर फिलहाल चुप्पी छायी हुई है. ऐसे में धार्मिक न्यास परिषद और गठित कमिटी के अध्यक्ष द्वारा इस मामले में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है ताकि ठाकुरबाड़ी और मंदिर जैसी जगह विवादों के बजाय आस्था का प्रतीक बना रहे.