भारत के जनता कर्फ्यू की प्रभावशीलता से अमेरिकी वैज्ञानिक आश्चर्यचकित

पटना | कोरोना वायरस की मारक क्षमता और इसके फैलाव की तीव्रता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लागू करने की अपील पिछले दिनों की थी. आज पूरे देश भर में जनता कर्फ्यू लगे रहने की खबरें लगातार मिल रही हैं. लेकिन इस कर्फ्यू की प्रभावशीलता से अमेरिकी वैज्ञानिक चकित हैं.

अमेरिकी वैज्ञानिक छुआछूत जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए पिछले तीस वर्षों से शोध कर रहे हैं, लेकिन अभीतक उनका शोध किसी निष्कर्ष तक नही पहुंच पाया है. उन्हें हैरत इस बात की है कि कम्युनिटी सेपरेशन का विचार उनके मन में अभीतक क्यों नही आया.

दरअसल, कोरोना वायरस के तेजी से फैलने और विध्वंस मचा देने की संभावना और भारत मे एक दिन के जनता कर्फ्यू पर विचार करने के लिए अमेरिका के शीर्ष वैज्ञानिकों ने एक मीटिंग की. इस मीटिंग के लिए उन्होंने 45 मिनट का समय निर्धारित किया था, लेकिन यह मीटिंग तीन घण्टे तक चली.

विदित हो कि मानव शरीर के अतिरिक्त वायुमण्डल में या किसी भी स्थान पर कोरोना वायरस 12 घण्टे ही जीवित रह सकता है. इस अवधि के बाद यह स्वतः नष्ट हो जाता है. जनता कर्फ्यू आज सुबह 7 बजे से शाम के 9 बजे तक यानी 14 घण्टे का होगा. कर्फ्यू की वजह से जो कम्युनिटी सेपरेशन होगा उसके दो घण्टे पहले ही वातावरण और सतहों पर मौजूद कोरोना वायरस स्वतः नष्ट हो जाएंगे. कम्युनिटी सेपरेशन के इस आह्वान ने ही अमेरिकी वैज्ञानिकों को चकित कर दिया.

किसी जानलेवा वायरस के वातावरण और सतहों पर मौजूद रहने की स्थिति में कम्युनिटी सेपरेशन इतना कारगर हो सकता है जिसमे बिना किसी खर्च के इस आपदा को नियंत्रित किया जा सकता है, इस निष्कर्ष ने अमेरिकी वैज्ञानिकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मुरीद बना दिया है.

(वरिष्ठ पत्रकार अनुभव सिंहा की रिपोर्ट)

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