सावधान, अब शराबबंदी के खिलाफ बोलना भी है जोखिम भरा !

पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क)| अब शराबबंदी के खिलाफ बोलना भी जोखिम भरा (Speaking against prohibition is too risky in Bihar) हो सकता है. जी हाँ, शुक्रवार को शराबबंदी शपथ समारोह (Prohibition Oath Ceremony) में मुख्यमंत्री ने ऐसे संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि जो कोई भी शराबबंदी के खिलाफ बोलता है, उसकी भी जांच होनी चाहिए.

नशा मुक्ति दिवस (Drug De-addiction Day) के अवसर पर शुक्रवार को ज्ञान भवन (Gyan Bhawan Patna) में शपथ ग्रहण का आयोजन किया गया था. इसमें नीतीश ने मौजूद लोगों सहित सभी सरकारी कार्यालयों के अधिकारियों-कर्मियों को शपथ दिलाई. इस कार्यक्रम का आयोजन मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग ने किया था.

शराबबंदी के खिलाफ लगातार बोलने वालों पर नीतीश ने लगाम लगाने के उद्देश्य से कहा कि ऐसे लोग जांच के दायरे में आ सकते हैं. बता दें, शराबबंदी को खत्म करने पर बयानबाजी करने वालों में विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के भी नेता-विधायक शामिल हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि “शपथ इसलिए करवा रहे हैं ताकि फिर से एक बार मन मजबूत हो. कोई दाएं-बाएं ना करें. सरकारी तंत्र में यदि कोई गड़बड़ करता हैं तो बर्दाश्त नहीं होगा. जो नियम कानून है, निश्चित रूप से एक्शन लिया जाए”.

शपथ ग्रहण में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ये कहें…

“यदि कोई शराबबंदी के खिलाफ बोलता है, तो उसकी भी जांच होनी चाहिए. उनकी भी जांच हो कि आखिर वह किस आधार पर इस तरह का बयान दे रहे हैं. कुछ बिजनेस कम्युनिटी के लोग यह कह रहे हैं कि हम तो शराबबंदी के पक्ष में हैं, लेकिन जो बाहर से लोग आते हैं, उन्हें शराब परोसना चाहिए. यह कहां का नियम है साहब कि लोगों के स्वागत में शराब परोसा जाए, यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”

“शपथ इसलिए करवा रहे हैं ताकि फिर से एक बार मन मजबूत हो. कोई दाएं-बाएं ना करें. सरकारी तंत्र में यदि कोई गड़बड़ करता हैं तो बर्दाश्त नहीं होगा. जो नियम कानून है, निश्चित रूप से एक्शन लिया जाए.”

“जब यह लागू किया गया था, उसी पार्टी के एक नेता के पास मद्य निषेध विभाग था. ताज्जुब होता है कि 1-2 नेता किस तरह से बोलते हैं. शपथ लिया था, अब चाह रहे हैं कि दारु पिएं.”

“यह स्पष्ट हो जाना चाहिए कि यदि शराब पियोगे तो मरोगे. कोई ना कोई गड़बड़ शराब देगा और वह शराब पियोगे तो मरोगे. इसको प्रचारित करना चाहिए. शपथ सबने लिया था. सिर्फ हमने नहीं लिया था. सदन से लेकर सड़क तक सब ने शपथ लिया था.”

“एक जगह शादी में चला गया, तो लोग मुद्दा बना रहे हैं. लोगों से सूचना मिली तो मद्य निषेध विभाग के पदाधिकारी और पुलिसकर्मी गए. जांच करना गुनाह है? कोई गड़बड़ करेगा तो पकड़ आएगा. यदि नहीं करेगा तो कोई बात नहीं है. यह तो करना पड़ेगा. सूचनाएं मिलेंगी तो पुलिस और मध निषेध विभाग के लोग जाएंगे. जो सूचनाएं मिलती हैं तो 100 परसेंट सूचना सही नहीं मिलती है, लेकिन इसे मुद्दा नहीं बनाना चाहिए.”

“मैंने 16 नवम्बर को 7 घंटे गहन विचार किया. जान लीजिए, ये शराब जान ले लेगा. कौन लोग मरे हैं, जिसने शराब पिया है. जब बंदी है तो फिर उन्हें शराब पीने की क्या जरूरत है.”

“2011 में ही नशा मुक्ति को लेकर हम लोगों ने एक दिवस बनाया था. 26 नवंबर को नशा मुक्ति दिवस हमने ही नाम दिया था. 2018 में WHO ने शराबबंदी को लेकर बेहतर रिपोर्ट दी थी. रिपोर्ट में बताया कि 30 लाख लोगों की मौत देश में शराब से हो गई थी.”

“मीडिया वाले तरह-तरह की बात रखते हैं. उनसे पूछिएगा, यह क्या शराब पीना जरूरी है. क्या शराब पिया जा सकता है. लोग कहते हैं कि अल्टरनेटिव बनेंगे, क्या अल्टरनेटिव बनेंगे. शराबबंदी खत्म करके अल्टरनेटिव बनेंगे.”

शपथ न लेनेवालों को एक हफ्ते में लेना होगा शपथ

इससे पहले मुख्यमंत्री ने शराबबंदी को लेकर जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. शपथ लेने के बाद सभी से हस्ताक्षर कराया गया. शुक्रवार को राज्यभर के करीब 8 लाख से अधिक पदाधिकारी-कर्मचारियों ने शपथ लिया.

सरकार ने आदेश जारी किया है कि 26 नवंबर को शपथ नहीं ले सकने वाले सरकारी कर्मियों को एक हफ्ते में शपथ ले लेना होगा. उन्हें शपथ लेने का वीडियोग्राफी करवाना होगा और फिर उसे विभाग को सौंपना होगा.