प्रत्यय अमृत को ही नीतीश कुमार ने क्यों दिया स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा?

Patna (TBN – The Bihar Now डेस्क) | मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोरोना संकट और अपनी सरकार की आलोचना के बाद सोमवार को बिहार स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव उदय सिंह कुमावत को हटाकर उनके जगह प्रत्यय अमृत को अब इस विभाग का जिम्मा दिया है. कहने को तो कुमावत का तबादला स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के द्वारा कैबिनेट बैठक में शनिवार को इस शिकायत के बाद की गई, जब उन्होंने कहा कि प्रधान सचिव उनकी बात नहीं सुनते. लेकिन सवाल हैं कि नीतीश ने प्रत्यय अमृत जो की बिजली और आपदा जैसे दो महत्वपूर्ण विभाग पहले से चला रहे थे, उन्हें ही क्यों चुना?

अगर बिहार सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों की माने तो खुद नीतीश कुमार के पास बहुत ज़्यादा विकल्प नहीं थे. एक तो जहां पूरे देश में उनकी जमकर आलोचना हो रही थी. खुद उन्हें यह समझ में आ गया था कि दो महीने पूर्व गठबंधन के दबाव में विभाग का जिम्मा संजय कुमार ठीक-ठाक चला रहे थे और मंत्री के दबाव में नीतीश कुमार ने उन्हें हटाकर ग़लत किया, जिसका खामियाज़ा उन्हें सबसे ज़्यादा उठाना पर रहा हैं. दूसरी गलती उन्होंने कुमावत पर भरोसा कर के कि, जिनकी कोई इच्छा ना तो स्वास्थ्य विभाग में थी और ना ही कोरोना जैसे संकट और चुनौती से निबटने में थी.

ऐसे में नीतीश कुमार के पास तेज तर्रार और अनुभवी अधिकारियों में बहुत ज्यादा विकल्प नहीं बचा था. खासकर नीतीश कुमार किसी भी हाल में पहले मीडिया और पूरे देश में उनकी सरकार की नाकामियों को लेकर जैसी आलोचना हो रही हैं, उससे जल्द से जल्द निजात चाहते हैं. प्रत्यय अमृत ने लालू-राबड़ी राज में जिला अधिकारी के रूप में अच्छा काम किया, फिर नीतीश के समय पहले पुल निगम फिर पथ निर्माण विभाग और बाद में बिजली विभाग में दिए गए लक्ष्यों को पूरा किया. वहीं इसके लिए प्रत्यय ने पूरे देश में खूब प्रसिद्धि भी बटोरी. सबसे बड़ी बात यह रही हैं कि नीतीश कुमार के राजनीतिक संकट के समय भी एक अधिकारी के आचरण के विपरीत कभी पाला नहीं बदला.

हाल में जब प्रवासी श्रमिकों को वापस लाने का मसला हुआ तो हर राज्य और रेल से संपर्क और तालमेल कर पूरे बीस लाख से अधिक लोगों की घर वापसी करायी. हालांकि स्वास्थ्य विभाग वो भी कोरोना के समय बहुत आसान काम करने की जगह नहीं हैं. खासकर जब स्वास्थ्य विभाग के फ्रंटलाइन पर लगे लोगों का मनोबल काफी ऊंचा नहीं है. फिलहाल अभी तक कोरोना में नीतीश कुमार के सारे दांव फेल ही हुए हैं और अब देखना हैं कि उनका यह निर्णय कितना सही साबित होता है.