वापस आए मजदूरों ने कहा, अपने प्रदेश की माटी पर काम मिले तो बाहर नहीं जाएंगे

vaapas aae majadooron ne kaha, apane pradesh kee maatee par kaam mile to baahar nahin jaenge

सीतामढ़ी (TBN रिपोर्ट) | अपने प्रदेश की माटी पर पैर रखते ही लुधियाना से लौटी हेमा की आँखों मे खुशी से आँसू छलक आये. उसने बिहार सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब वो वापस अपने राज्य से बाहर नहीं जाएगी, बल्कि वो बिहार में ही काम करेगी. उसने सरकार से बिहार में ही काम की सुविधा उपलब्ध कराने का निवेदन किया.

गौरतलब है कि पटना के नौबतपुर की हेमा देवी लुधियाना में पैकिंग का कार्य करती है. हेमा ने बताया कि इस कार्य से वह हर महीने लगभग पाँच हजार रुपये कमा लेती है.

शहनाज खातून, विनय कुमार, तम्मना हुसैन, साबिर हुसैन सहित कई श्रमिकों ने दी बिहार नाउ से बातचीत के क्रम में बताया कि वे सभी लोग फैक्ट्री में कपड़े की सिलाई, कढ़ाई आदि का काम करते हैं. उन्होंने बताया कि सभी औसतन 15 हजार रुपये तक हर महीने कमा लेते है.

सबों का एक ही कहना था कि उन्हें यदि सीतामढ़ी या अगल-बगल के गाँव/शहर में ही इस तरह का काम मिल जाता है तो वे अपने राज्य से बाहर नहीं जाएंगे. उन्होंने यहां तक कहा कि यदि मौका मिले तो वे यहां दूसरों को अपने हुनर का प्रशिक्षण भी दे सकते है.

बताते चले कि लुधियाना हौजियरी अथवा रेडीमेड कपड़े का एक बड़ा हब है. बिहार सरकार भी बाहर से लौट रहे सभी प्रवासी भाइयो का स्किल सर्वे करवाने का निर्देश दे चुकी है, ताकि उनकी स्किल के अनुसार बिहार में उन्हें कार्य करने का अवसर दिया जा सके.

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