अंबेडकर की मूर्ति के सामने अनोखी शादी बनी चर्चा का विषय 

बेगूसराय (संदीप फिरोजाबादी की रिपोर्ट) | आजकल समाज में फैले अंधविश्वास, कुरीतियों और अपने मान सम्मान की खातिर अपनी हैसियत से ज्यादा बढ़-चढ़कर मंहगी और खर्चीली शादियों का चलन चल रहा है. शादियों में किये गए बेहिसाब खर्चे की वहज से बहुत से लोग कर्ज में भी डूब जाते हैं. ऐसे में आज के समय में अगर कोई शादी बिना स्टेज-मंडप, बिना शादी की पार्टी या किसी तरह के भोज आयोजन के बिना ही संपन्न हो जाये तो बड़े आश्चर्य की बात है.

भारत में हर धर्म में शादियों के विभिन्न प्रकार के पारंपरिक रीति-रिवाज हैं.लेकिन बेगूसराय जिले के बलिया अनुमंडल क्षेत्र में एक अनोखी शादी सभी लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है. यहाँ एक जोड़े ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को साक्षी मानकर प्रतिमा के समक्ष एक दूसरे को माला पहनाकर विवाह रचा लिया. इस तरह से इस शादी में न स्टेज सजाया गया, न मंडप सजाया गया, और न ही किसी तरह के भोज का आयोजन किया गया. बिना शोर शराबा किये और फिजूल खर्चे के बिना ही शादी हो गयी. जिसे सभी लोगों के द्वारा काफी सराहा जा रहा है.

मिली जानकारी के अनुसार खगडिय़ा जिला के मछरहा निवासी ललन दास के पुत्र अमित दास की शादी बलिया प्रखंड क्षेत्र के भगतपुर निवासी प्रकाश दास की पुत्री कल्याणी कुमारी के साथ तय हुई थी. जब बारात निर्धारित तिथि पर बलिया पहुंची तब रविदास संघ से जुड़े कार्यकर्ताओं ने   दोनों पक्षों को इस बात के लिए राजी किया कि वे धार्मिक परंपरा से अलग हटकर शादी करके एक मिसाल पेश करेंगे. जिसके बाद वर-वधू और दोनों तरफ के बाराती-सराती बलिया के अंबेडकर पार्क स्थित अंबेडकर की प्रतिमा के पास पहुंचे और उनकी प्रतिमा को ही साक्षी मानकर उसके सात फेरे लिए. इस तरह से समाज और आसपास के लोगों में यह शादी बड़ी चर्चा का विषय बन गयी क्यूंकि अभी तक किसी ने भी इस प्रकार से अंबेडकर की प्रतिमा के सामने शादी नहीं की थी.