बूझ न सके जो कभी वो चिराग हो तुम…..जख्मी कांत “निराला” की स्मृति में श्रद्धांजलि का आयोजन

बड़हरा / भोजपुर (आमोद कुमार – The Bihar Now डेस्क) | समकालीन भोजपुरी-हिन्दी के अग्निगर्भा शीर्ष जनवादी कवि, गीतकार, स्वतंत्रता रचनाकार, प्रगतिशील जनवादी चेतना के प्रखर पहरेदार, अर्जक संघ एवं बामसेफ की विचारधारा को अपने गीत, कविता, लेखन से जन-जन तक पहुंचाने वाले, फुले-अंबेडकरी विचारधारा के साथ संकल्पित रचनाकार जय कुमार राय ‘जख्मी’ उर्फ जख्मी कांत निराला की स्मृति में श्रद्धांजलि-सह-काव्यांजलि का आयोजन किया गया.

“साहित्य-सृजन”* समूह संस्था, बिहार प्रदेश की ओर से उनकी जन्मभूमि जिला-भोजपुर प्रखंड-बड़हरा के कोल्हरामपुर, बबुरा में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में बिहार के कोने-कोने से आये हिन्दी-भोजपुरी के मूर्धन्य कवि व साहित्यकारों ने सर्वप्रथम यशस्वी डा. जख्मी कांत निराला के तैलचित्र पर पुष्पांजलि कर शोक व्यक्त किया और कहा कि जख्मी कांत निराला ने अपने लेखन एवं मंच के माध्यम से भोजपुर जनपद का नाम पूरे बिहार के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी रौशन करने का कार्य बखूबी निभाया. जनवादी लेखक संघ पटना के संयुक्त सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने साहित्यिक गतिविधियों में जान डालने का कार्य करते रहे. उनके असामयिक निधन से भोजपुरी और हिन्दी साहित्य की अपूरणीय क्षति है जिसे भविष्य में पूरा करना असंभव है.

भोजपुरी भाषा-भाषियों के बीच भोजपुरी का अलख जगाने वाले रामदास राही ने अपने विचार प्रकट करते हुए कहा कि डा. जख्मी कांत निराला, लोककलाकार भिखारी ठाकुर के विचारधारा को अपना कर भोजपुरी साहित्य को उचाईयों तक ले जाने में भी महती भूमिका निभाये. अपनी पहली भोजपुरी कविता संग्रह “अनमोल रतन भिखारी ठाकुर” में जख्मी कांत निराला की भिखारी ठाकुर के जीवन से संबंधित सतहत्तर कविताएं संकलित हैं जो पाठकों तक पहुंच चुकी हैं.

इसके अतिरिक्त प्रकाशित यादवेश, चौथा खंभा, चित्रगुप्त, चेतना, जगदेव प्रसाद स्मारिका, भोजपुरी विश्व इत्यादि पुस्तकें जन को समर्पित हैं. कवि साहित्यकार और उनके सहित्यिक जीवन के साथी रजनीश कुमार गौरव ने बताया कि उनका दूसरा कविता संग्रह अइसन रहलन भिखारी प्रेस में छपने की प्रक्रिया में है तथा सैकड़ों गीत, गजल, कविता संग्रह यथा: कुतुबपुर के कलाकार-कविता संग्रह, मन भरम में ना परी-भोजपुरी गीत संग्रह, मरजाद-उपन्यास, कफन ना मंगलीं-कविता संग्रह, रवो बेटा के बावग करीं- नाटक तथा मैं विज्ञान के साथ हू- कविता संग्रह और आठवां आश्चर्य कविता संग्रह की रचना उनके द्वारा की गई है.

हिन्दी, भोजपुरी के गीतकार और गजलकार, जख्मी कांत निराला के साथ साहित्यिक जीवन जीने वाले रचनाकार, शिक्षक राजाराम सिंह “प्रियदर्शी” ने शोक व्यक्त करते हुए बताया कि जख्मी कांत एक ऐसे शख्स रहे जिन्होंने साहित्यिक जीवन के साथ राजनैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक क्षेत्र में हर जख्म सहते हुए भी अपनी अमिट पहचान को छोड़ गये हैं जो उन्हें लोगों की यादों में रखने का कार्य करता रहेगा.

इस अवसर पर जख्मी कांत की स्मृति में उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को समेटती आदरांजलि छोटी पुस्तक का भी साहित्यकारों द्वारा लोकार्पण किया गया जिसमें उनके द्वारा लिखित पंक्तियां गूंज रही जो हर दिल में वो आवाज हो तुम, बूझ न सके जो कभी वो चिराग हो तुम उनकी बरबस सबके मन को झकझोर रही थीं.

हरदिल को मर्माहत कर देने वाले इस अवसर पर जख्मी कांत की रचनाओं के मुरीद पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष, छपरा, राजेंद्र प्रसाद राय, उमा शंकर साहू, रविन्द्र शाहाबादी, रघुनाथ यादव, बिहार प्रदेश, अर्जक संघ के राज्याध्यक्ष, अरुण गुप्ता, जगत भूषण, रामेश्वर शर्मा, वैशाली, मित्र, सहपाठी सुरेन्द्र शर्मा ‘विशाल’ सनसाईन पब्लिक स्कूल के प्रबंधक, डा. विजय सिंह यादव, अनिल सुमन, अर्जुन सिंह, हृदय नारायण शर्मा “हेहर” अरुण देवांश छपरा,ज्ञानेश्वर गुंजन, बबिता दुबे, मनोज कुमार,कपिभद्र, असलम सागर, अखिलेश्वर प्रसाद यादव, मोतीलाल यादव, सारन, मुजफ्फरपुर, सहित जख्मी कवि पुत्र पुष्कर आनंद, कुणाल कुमार ने अपनी कविताओं एव विचारों माध्यम से उन्हें याद किया.

वरीय साहित्यकार अविनाश नागदंश, समाजसेवी, सुदर्शन प्रसाद राय, डा. राकेश कुमार ने भी शोकसभा को संबोधित करते हुए डा. जख्मी कांत निराला के आसामयिक निधन से हिन्दी- भोजपुरी साहित्य की अपूरणीय क्षति बताया. कार्यक्रम की अध्यक्षता राजेन्द्र प्रसाद व राज बल्लभ यादव और संचालन ज्ञानेश्वर गूंजन ने किया.