भूख से हुई मौतों का असर कोरोना से हुई मौतों से कहीं ज्यादा : प्रो. अरविंद आदित्य राज

पटना (TBN रिपोर्ट)| बिहार की राजधानी पटना स्तिथ अनुग्रह नारायण कॉलेज (ए एन कॉलेज) के वेबीनार व्याख्यानमाला के द्वितीय व्याख्यान का आयोजन शनिवार को आयोजित किया गया. व्याख्यान के मुख्य वक्ता प्रख्यात पॉलीटिकल साइंटिस्ट, कॉलेज ऑफ कॉमर्स आर्ट्स एंड साइंस के प्रोफेसर अरविंद आदित्य राज थे. अपने व्याख्यान में प्रोफ़ेसर आदित्य राज ने विस्तार से कोविड-19 के विभिन्न आर्थिक एवं राजनीतिक पहलुओं की विस्तार से चर्चा की .

अरविंद आदित्य राज ने कहा कि इस महामारी के कारण अविरल वैश्वीकरण प्रक्रिया का विस्तार थमेगा तथा राष्ट्रवाद की भावना का उदय होगा. हालांकि अब वैश्वीकरण प्रक्रिया का विस्तार बहुत दिनों तक रोका नहीं जा सकता है. परंतु यह निश्चित है कि वैश्वीकरण प्रक्रिया के जो तरीके अपनाए गए हैं, उस तरीको की काफी आलोचना होगी .

प्रोफेसर अरविंद आदित्य राज ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगर फिर से चुनाव जीत जाते हैं तो अमेरिका फर्स्ट की नीति और तेज हो जाएगी. अमेरिका की इस पॉलिसी का फायदा चीन जैसे देश उठाएंगे. कोविड-19 के प्रभाव सभी देशों पर सिर्फ स्वास्थ्य संबंधी नहीं बल्कि राजनैतिक और आर्थिक भी हैं. वुहान से वाशिंगटन तक इस वायरस के राजनैतिक और आर्थिक असर दिखने लगे हैं. कोविड-19 खत्म होने के बाद अमेरिका और चीन मे स्वास्थ्य, सतत विकास ,जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर गंभीर मतभेद बढ़ सकते हैं. हालांकि इन मतभेदों के कारण ही वैश्वीकरण की प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी .

प्रोफ़ेसर आदित्य राज ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि कोविड-19 के कारण सभी देशों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. आज विश्व के सभी देश आर्थिक शक्ति के कारण ही राजनैतिक शक्ति प्राप्त करते हैं . कोविड-19 के कारण व्यापार, विदेशी निवेश बुरी तरीके से प्रभावित होगा. उपभोक्ता व्यय में काफी कमी आएगी. इन सभी वजह से मैन्युफैक्चरिंग भी प्रभावित होगा. सरकार राजकोषीय नीति, मौद्रिक नीति तथा औद्योगिक नीति में परिवर्तन कर कोविड-19 के आर्थिक प्रभावों को कम कर सकती है . इस मामले के कारण वैश्विक स्तर पर बेरोजगारी में काफी इजाफा हुआ है.

उन्होंने कहा कि भारत के लिए लॉक डॉन अभिशाप और वरदान दोनों साबित हुआ है . भारत में कोविड-19 का विस्तार अन्य देशों की अपेक्षा काफी कम हुआ है पर इसकी बड़ी जनसंख्या जो गरीबी रेखा के नीचे रहती है वह भूख से मौत के साए में अपना गुजर बसर कर रही है . भूख से हुई मौतों का असर कोविड-19 से हुए मौतों से कहीं ज्यादा है. कोविड-19 के कारण भारत की विकास दर काफी कम रह सकती है. मूडी इन्वेस्टर्स सर्विसेस के अनुसार इस वित्तीय वर्ष में भारत का आर्थिक विकास दर अनुमान 0% आंका गया है. कोविड-19 के असर के बाद भारत को एक मजबूत औद्योगिक नीति की जरूरत है और इसके लिए भारत को व्यापक उपाय करने पड़ेंगे. महत्वपूर्ण मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों की पहचान करना उन्हें कर प्रोत्साहन देना इसकी एक कड़ी है. साथ ही भारत के लिए अति महत्वपूर्ण होगा कि वह अमेरिका के नीतियों का सूक्ष्मता से अवलोकन करता रहे. अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हुए किसी भी गिरावट का सीधा असर भारत पर पड़ेगा तथा यह भारत में निवेश को प्रभावित कर सकता है.

प्रधानाचार्य प्रोफेसर शशि प्रताप शाही ने स्वागत भाषण करते हुए कहा कि कोविड-19 निश्चित रूप से एक वैश्विक समस्या है परंतु भारत हमेशा से इस प्रकार के कठिनाइयों को परास्त कर आगे बढ़ता रहा है. आज जरूरत है कि भारत गांधी जी के बताए आर्थिक नीतियों को अपनाएं तथा कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दे. साथ ही भारत और अमेरिका साथ आकर वैश्विक समस्याओं को खत्म करने में अहम योगदान दे सकते हैं.

व्याख्यानमाला का विषय प्रवेश प्रोफेसर संजय कुमार ने किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ रत्ना अमृत तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ अरुण कुमार ने किया. विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक एवं छात्र ऑनलाइन उपस्थित होकर व्याख्यानमाला से लाभान्वित हुए.