पाकिस्तान में भगवान बुद्ध की प्रतिमा तोड़े जाने से बौद्ध भिक्षु नाराज

गया / पटना (TBN – The Bihar Now डेस्क) | गया में भिक्षुओं ने पाकिस्तान में प्राचीन भगवान बुद्ध की प्रतिमा के तोड़फोड़ पर कड़ी नाराजगी जताई है. जैसा कि मालूम है, पाकिस्तान में मरदान के तख्तभाई क्षेत्र में निर्माण कार्य के दौरान प्राचीन बुद्ध की मूर्ति मिली थी. बुद्ध की प्राचीन मूर्ति को तोड़ने के जुर्म में पाक के उत्तर-पश्चिम खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

पाकिस्तान में समय-समय पर धार्मिक असहिष्णुता के मामले सामने आते रहे हैं. इसी कड़ी ने वहां भगवान बुद्ध की दुर्लभ प्रतिमा को तोड़ने का मामला सामने आया है. यह बहुत प्राचीन तथा दुर्लभ प्रतिमा थी जिसे खेत में खुदाई करने के दौरान पाया गया था. लेकिन एक स्थानीय मौलवी के द्वारा प्रतिमा को गैर इस्लामी बताए जाने पर लोगों ने इस प्रतिमा को तोड़ दिया.

यह घटना पाक के उत्तर-पश्चिम खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत की है जहां मरदन जिले की तख्तबाई तहसील में एक खेत में पाइपलाइन बिछाने के लिए की जा रही खुदाई के दौरान मजदूरों को गौतम बुद्ध की दुर्लभ मूर्ति मिली. इस बात की जानकारी मिलने पर घटना स्थल पर स्थानीय मौलवी पहुंच गया और बुद्ध की उस प्रतिमा को गैर इस्लामी करार दिया. उसके बाद उस मौलवी के कहने पर लोगों ने बुद्ध की प्रतिमा को तोड़ डाला.

बाद में इस प्रतिमा को तोड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है. गिरफ्तार लोगों में ठेकेदार कमर जामन और अन्य लोग शामिल हैं. घटनास्थल से पुलिस ने प्रतिमा के टूटे हुए टुकड़े भी बरामद किए है. खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के पुरातत्व विभाग के अनुसार सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले में कार्रवाई करने के लिए पुलिस को सूचना दी गई थी. पुरातत्व विभाग के निदेशक अब्दुल समद ने कहा है कि बुद्ध की प्रतिमा तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

बताया जाता है कि खैबर पख्तूनख्वा प्रांत का तख्तबाई इलाका श्रीलंका, कोरिया और जापान के लोगों के लिए पर्यटन स्थल है. क्योंकि यह क्षेत्र गांधार सभ्यता के शुरुआती शहरी बसावटों में से एक माना जाता है जिसे बौद्ध धर्म के अनुयायी पवित्र मानते हैं.

यहां पहले भी मिली हैं बुद्ध प्रतिमाएं

जैसा की बताया जाता है, खैबर पख्तूनख्वा का पुराना नाम गांधार है. यहां पहले भी बौद्ध प्रतिमाएं मिलती रही हैं. 2017 में भमाला में बुद्ध की दो प्राचीन व दुर्लभ प्रतिमाएं मिली थीं. इस स्थल पर निकली एक प्रतिमा गौतम बुद्ध की मृत्यु को दर्शाती है जबकि दूसरी प्रतिमा उनके प्रभामंडल को दर्शाने वाली थी. मृत्यु को दर्शाने वाली प्रतिमा अनोखी है और अपनी तरह की दुनिया की सबसे प्राचीन प्रतिमाओं में एक है. अमेरिकी प्रयोगशाला ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा था कि यह तीन शताब्दी ईसा पूर्व से भी पुरानी हो सकती है.