सर्दियों में निमोनिया की संभावना अधिक, करें बच्चों की विशेष देखभाल

आरा (ओपी पांडे – The Bihar Now रिपोर्ट)| आरा जिला में पछुआ हवाओं के कारण लगातार तापमान में गिरावट हो रही है. यहां का तापमान सुबह में 9 डिग्री लेकर 12 डिग्री के बीच रह रहा है. इस वक्त सर्द हवाओं ने बुजुर्गों और छोटे बच्चों को परेशान कर रखा है. घर-परिवार में छोटे बच्चों की अतिरिक्त देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि बढ़ते ठंड में बच्चों के शरीर का तापमान कम होने लगता है जिसके कारण उनको निमोनिया होने का खतरा बढ़ जाता है.

जिला के असिस्टन्ट चीफ मेडिकल ऑफिसर (ACMO) डॉ. विनोद कुमार ने हमारे संवाददाता को बताया ठंड के मौसम में छोटे बच्चों को सर्दी-खांसी और निमोनिया होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. साथ ही, प्रदूषित हवा का वातावरण में काफी नीचे रहना तथा बच्चों में इम्यूनिटी का कम होना उनके लिए खतरनाक साबित हो सकता है.

बीमारियों का मुख्य कारण संक्रमण

असिस्टन्ट चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनोद कुमार के अनुसार सर्दियों में परिवार के लोग एक ही कमरे में साथ रहते हैं. उस कमरे में ओवर क्राउडिंग होने के कारण सांस संबंधी रोग होना का खतरा हो जाता है. उन्होंने बताया कि लोग यह सोचते हैं कि उनके बच्चे या परिवार के अन्य सदस्य सर्दी में ठंड के कारण बीमार होते हैं. लेकिन, वास्तव में इस वक्त बीमारी के प्रसार का मुख्य कारण इंफेक्शन यानि संक्रमण होता है. इसी कारण कई बार हम ठंडी हवा से बचाने के चक्कर में बच्चों को ज्यादा बीमार कर लेते हैं.

सर्दियों में माताएं अपने बच्चों को पूरे दिन डाइपर पहनाती हैं. डाइपर के ज्यादा प्रयोग से बच्चों में यूरिनरी इन्फेक्शन की शिकायत बढ़ जाती है. बच्चों को ठंड से बचाने के लिए मां रातभर अपने बच्चे को डाइपर पहना कर रखती हैं. इस कारण लंबे समय तक डाइपर में लिपटे रहने से बच्चे में इन्फेक्शन होने की संभावना हो जाती है.

मालिश बहुत जरूरी, इससे शरीर में आती है गर्मी

डॉ. विनोद ने बताया मांओं को बच्चों को तेल मालिश करते देखा जाता है. सर्द के दिनों में शिशुओं और बच्चों के शरीर पर तेल मालिश करने से ठंड से बचाव होता है. मालिश के कारण त्वचा से मॉइस्चर खत्म नहीं होता और त्वचा सॉफ्ट बनी रहती है. साथ ही बच्चे के शरीर की गर्मी अंदर ही बनी रहती है. बच्चे के शरीर को गर्म रखने के साधन सही हैं या नहीं, यह बच्चे के शरीर के तापमान से समझा जा सकता है.

डॉक्टर के अनुसार, यदि बच्चे के शरीर का तापमान 36 डिग्री सेंटीग्रेड के नीचे है तो समझ लेना चाहिए कि उसे गर्मी देने के उपायों को बढ़ाना है. साथ ही, उनके कपड़े प्रतिदिन अच्छे से साफ कर धूप में सुखाना चाहिए. बिना गर्म कपड़ों के उन्हें घर के बाहर लेकर नहीं निकला चाहिए.

बच्चों को निमोनिया से बचाने में सहायक है पीसीवी वैक्सीन

जिला के सिविल सर्जन डॉ. ललितेश्वर प्रसाद झा ने बताया कि ठंड में बच्चों में कई बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है, जिसमें निमोनिया भी एक है. निमोनिया से बचाने के लिए पीसीवी वैक्सीन काफी सहायक होता है. इस वैक्सीन को सरकार द्वारा नियमित टीकाकरण में शामिल किया गया है. इसे तीन खुराकों में दिया जाता है जो बच्चों को निमोनिया से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

बता दें कि चिकित्सक 2 साल से कम और 2 से 5 साल के बच्चों को अलग-अलग निमोनिया के टीकों की सलाह देते हैं. डॉक्टरों के अनुसार धुम्रपान से परहेज, स्वस्थ एवं संतुलित जीवन शैली तथा साफ सफाई का ध्यान रख निमोनिया से बचा जा सकता है.

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