सुगर फ्री और मोटापा घटाने वाली मैजिक धान की फसल है तैयार

बगहा / रामनगर (इमरान अजीज – The Bihar Now डेस्क) | बरसात और बाढ़ की विभीषिका के साथ वैश्विक महामारी कोरोना काल में लंबे समय तक क्या आम क्या ख़ास प्रकृति के कहर से सभी दो चार होते रहे हैं. इसी बीच एक अच्छी ख़बर बिहार के बगहा से आई है जहां मैजिक धान की तैयार फसल अब किसानों के खेत से तैयार होकर कटने लगा है.

दरअसल बिहार के किसानों ने असम के बाद पश्चिम बंगाल की तर्ज़ पर इसकी शुरुआत चंपारण के रामनगर प्रखंड स्थित सोहसा हरपुर से किया. वैसे तो मैजिक नामक धान की खेती देश में असम के ब्रह्मपुत्र नदी तट पर माजुला द्वीप में प्रमुखता से की जाती है, लेकिन रामनगर प्रखंड स्थित हरपुर सोहसा निवासी किसान विजय गिरी पिछले साल पश्चिम बंगाल के कृषि मेला में इस प्रभेद को अपनाते हुए इस धान का बीज बिहार लेकर आए और इसकी खेती की. शुरू में प्रयोग के तौर पर यहां के किसानों में विजय गिरी के साथ अवधेश सिंह ने मैजिक धान को एक एक एकड़ ज़मीन पर लगाया, जिसके बाद मैजिक धान ने अपना मैजिक दिखाया है. अच्छी पैदावार और बग़ैर रासायनिक खाद के साधारण तरीके में जैविक विधि से तैयार होने वाले मैजिक धान ने यहां के किसानों को नई दिशा दी और यहीं वजह है कि इस बार चंपारण के रामनगर में किसानों ने इसकी खेती किया जिसे अब देखने और अपनाने इलाक़े से कई किसान पहुंच रहे हैं.

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मैजिक धान आमतौर पर बाढ़ के पानी में भी तैयार होने वाले सवार्णा धान समेत बासमती और काला नमक व कतरनी बीटी 52 से बिल्कुल अलग किस्म की है. इसकी बालियां तकरीबन 4-5 फीट ऊंची और लंबी हैं. इतना ही नहीं, मैजिक धान की पैदावार पर नज़र डालें तो एक बाली से 250-300 धान का दाना तैयार हुआ है जिसे देखकर किसान बेहद खुश हैं. इसकी सबसे बड़ी विशेषता कम लागत में सुगर फ़्री और मोटापा दूर करने वाली खूबियां हैं जिसको लेकर अब कई अन्य किसान भी इसकी खेती करने को तैयार हैं.

मैजिक धान के इस चावल को किसी ईंधन रसोई गैस या चूल्हा पर पकाने की जरूरत नहीं है इसे महज़ सादे सामान्य पानी में रखने के 45-60 मिनट के भीतर चावल से भात बनकर तैयार हो जाता है.

कृषि प्रधान और धान का कटोरा के तौर पर चंपारण का नाम देश भर में मशहूर है ऐसे में मैजिक नामक धान खेती किसानी में क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है इस धान ने यहां नया जादू दिखाया है जिससे किसान बेहद आह्लादित हैं.

हालाकि कृषि विभाग द्वारा अभी बिहार में इसे कोई प्रोत्साहन नहीं मिला है जिससे किसानों में थोड़ी निराशा ज़रूर है.

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बता दें कि आज़ादी से पूर्व नीलहों की खेती या सत्याग्रह आंदोलन की धरती बिहार में चंपारण के रामनगर से किसानों ने एक नई क्रांति की शुरुआत किया है जो मैजिक धान की पैदावार के रूप में अपना मैजिक दिखाना शुरू किया है जिसको लेकर यहां के अन्नदाता बेहद उत्साहित हैं. अब जरूरत है कि सरकारी स्तर पर मैजिक धान की खेती किसानी को प्रोत्साहित कर बढ़ावा देने की ताकि सरहद समेत पहाड़ी दुर्गम बाढ़ प्रभावित इलाकों समेत आपदा की स्थिति में भी साधारण पानी में भात बनकर तैयार होने वाले इस धान के किस्म का व्यापक पैमाने पर खेती कर पैदावार बढ़ाया जा सके.

चंपारण के हरपुर रामनगर में किसान विजय गिरि के इस अनूठी पहल और उन्नत किसानी को बढ़ावा देने के साथ मधुमेह जैसे घातक रोगियों के थाली में भात का स्वाद फीकी न रहे इसको लेकर मैजिक धान का कमाल अब दिखने लगा है जो निश्चित ही धान की उन्नत खेती के लिए वरदान साबित होगा.

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