शिक्षकों को बिना सुरक्षा झोंकना उचित नहीं, कार्य बहिष्कार को होंगे विवश – शिक्षक संघ गोपगुट

शिक्षकों को बिना सुरक्षा झोंकना उचित नहीं, कार्य बहिष्कार को होंगे विवश - शिक्षक संघ गोपगुट

पटना (TBN डेस्क) | वैश्विक महामारी कोविड-19 के खतरे के मद्देनजर बिहार सरकार ने प्रवासी बिहारियों के लिए पूरे राज्य में जगह जगह क्वारंटाइन सेंटर बनाए हैं. इन सेंटरों पर प्रशासन की तरफ से रहने, खाने, सुरक्षा और देखभाल की व्यवस्था की गई है एवं बड़े पैमाने पर नियोजित शिक्षकों को लगाया गया है.

प्रवासी बिहारी मजदूरों के वापस राज्य लौटने की प्रक्रिया काफी तेज हो गई है. इसके साथ ही उनके क्वारंटाइन के लिए प्रदेशभर में प्रशासन की तरफ से बनाये गये केंद्रों पर भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है.

हालांकि स्थानीय प्रशासन के द्वारा क्वारंटाइन केंद्रों पर प्रवासियों के लिए क्वारंटाइन केंद्रों के संचालन को लेकर चौकसी बरती जा रही है लेकिन क्वारंटाइन केंद्रों पर संचालन के लिए प्रतिनियुक्त कर्मियों की समस्या भी बढ़ती दिख रही है.

शिक्षक संघ गोपगुट के प्रदेश अध्यक्ष मार्कंडेय पाठक एवं प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पाण्डेय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी एहतियाती आदेश में जब कार्यस्थलों पर एक तिहाई से अधिक कर्मियों की उपस्थिति नहीं होनी है तो फिर किस आधार पर शिक्षा विभाग ने सभी शिक्षकों को विद्यालय जाने के का फरमान जारी किया है.

उन्होंने कहा कि लॉकडाउन का उल्लंघन करके क्वारंटाइन मानकों का पालन संभव नही है. सरकार ने अभी तक कोरोना वॉरियर्स के रूप में काम कर रहे नियोजित शिक्षकों को कोरोना वारियर्स तक घोषित नही किया है. गया सहित विभिन्न जिलों के क्वारेंटाईन केंद्रों पर शिक्षकों पर हमले की घटना सामने आ रही है.

उन्होंने आगे बताया कि क्वारंटाइन केंद्रों पर काम कर रहे नियोजित शिक्षकों के बीमा तक की व्यवस्था नही है. प्रदेश के तमाम जिलों में जिन शिक्षकों को क्वारंटाइन केंद्रों में प्रतिनियुक्ति हुई है, उन्हें सुविधा के लाले पड़े हैं. बिना सुविधाओं के पिछले एक पखवाड़े से अपने जान जोखिम में डालकर लोग कार्य कर रहे हैं.

संगठन ने कहा कि पदाधिकारियों से बात करने पर हर रोज केवल आश्वासन ही मिलता है. रात्रिकालीन ड्यूटी करनेवाले कर्मियों के सोने और बैठने एवं सुरक्षा का कोई भी इंतजाम नहीं है. प्रतिनियुक्त नियोजित शिक्षकों के लिये पीने का पानी, चाय नास्ता, अलग से शौचालय अनुपलब्ध है.

कई केंद्रों पर इतनी गर्मी के बावजूद कर्मी के लिये कोई पंखा उपलब्ध नहीं कराया गया है. प्रतिनियुक्त कर्मी के लिये वर्तमान में सेनिटाइजर, मस्क,गलव्स, मच्छर मारने वाली अगरबत्ती भी उपलब्ध नहीं है.

शिक्षक संघ गोपगुट के प्रदेश अध्यक्ष मार्कंडेय पाठक एवं प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पाण्डेय ने कहा कि केंद्रों पर कार्यरत कर्मियों का स्वास्थ्य जाँच अभी तक एक बार भी नहीं हो सका है. राज्यसरकार को अविलंब ईद के पूर्व सभी नियोजित शिक्षकों का मई तक का वेतन जारी करनी चाहिए.

सार्वजनिक परिवहन बंद होने और नियोजित शिक्षकों को पहचानपत्र निर्गत नहीं होने की स्थिति में आवागमन में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. इस परिस्थिति में कार्यरत कर्मियों के समक्ष असुरक्षा की स्थिति बनी हुई है. उपरोक्त मसले को लेकर टीईटी- एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ (गोपगुट) ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपरिहार्य पहल लेने की मांग की है.

संगठन के प्रदेश सचिव अमित कुमार और प्रदेश मीडिया प्रभारी राहुल विकास ने कहा कि सरकार क्वारेंटाईन केंद्रों पर काम कर रहे शिक्षकों को कोरोना वॉरियर्स घोषित करते हुए पचास लाख का बीमा और पर्याप्त सुरक्षा किट की व्यवस्था करे.

प्रदेश सचिव शाकिर इमाम, नाजिर हुसैन, व प्रदेश कोषाध्यक्ष संजीत पटेल ने कहा कि सरकार अविलंब पहल ले. बगैर एंटी कोरोना किट्स और सुरक्षा के क्वारंटाइन केंद्रों पर शिक्षकों को झोंकना उचित नही है. ऐसी अनदेखी की स्थिति में शिक्षक कार्य बहिष्कार को विवश होंगे.