“शराबबंदी” पर जीतन राम मांझी ने सरकार पर लगाए संगीन आरोप

पटना- (संदीप फिरोजाबादी की रिपोर्ट) “शराबबंदी” बिहार सरकार की एक अनूठी पहल थी. जिसकी सम्पूर्ण देश में सराहना की गयी थी. बिहार सरकार ने वर्ष 2016 में शराबबंदी क़ानून लागू किया था. जिसके अनुसार बिहार में किसी भी प्रकार की शराब की बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगाया गया था. लेकिन विपक्ष के नेता अपनी राजनीति चमकाने के लिए अजीबोगरीब बयान और मौजूदा सरकार पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं. कुछ ऐसा ही बयान बिहार महागठबंधन में शामिल हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के द्वारा दिया गया है.

जीतन राम मांझी ने कहा है कि “शराबबंदी क़ानून से सिर्फ गरीब, दलित, पिछडों और आदिवासी प्रताड़ित हो रहे हैं. इस क़ानून के तहत वही लोग जेल भेजे गए हैं”. आगे सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा “सभी मंत्रियों, विधायकों और अफसरों के घरों पर छापेमारी करे, अगर वहां से शराब की बोतलें नहीं मिलीं तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूंगा”.

वर्तमान सरकार के ऊपर पर नाराजगी जताते हुए जीतन राम मांझी ने सरकार से सवाल पूछा कि “बताए कि अब तक कितने विधायक, मंत्री, सांसद, विधान पार्षद, आईएएस और आईपीएस अफसर के आवास पर छापेमारी हुई है. क्या ऐसे तमाम लोग कभी शराब नहीं पीते थे, जो अचानक से छोड दिए? आखिर सरकार उनके घरों में छापेमारी से क्यों डर रही है?”

बिहार में इस साल होने चुनाव में सभी राजनीतिक पार्टियाँ नए नए पैंतरे आजमा रही हैं इसी क्रम में जीतन राम मांझी शराबबंदी को लेकर एक नया मुद्दा बनाकर बयान देते रहे हैं. ऐसा ही एक बयान बड़ा चर्चा में रहा था जिसमे उन्होंने कहा था “दारू कभी-कभी दवा के रूप में भी पेश की जाती है. मुझे इसका अनुभव है. बहुत पहले मैं हैजा से पीड़ित था, तब एक नुस्खे ने मुझे बचा लिया.” जीतन राम मांझी यहीं नहीं बल्कि मजदूर और गरीब वोट बैंक को लुभाने के लिए आगे कहते हैं, “थोड़ा शराब पीना काम करने वाले श्रमिकों के लिए संजीवनी के बराबर होता है, जो दिनभर कमरतोड़ मेहनत कर अपने घर लौटते हैं”.

जीतन राम मांझी के इस प्रकार के बयान के बाद बिहार के सियासी गलियारे में बड़ी चर्चा की जा रही है. एक ओर भाजपा के विधान पार्षद संजय मयूख ने कहा कि “शराबबंदी राजनीतिक मुद्दा नहीं है, और इसे राजनीति में नहीं घसीटा नहीं जाना चाहिए”.

बिहार के भूमि सुधार मंत्री राम नारायण मंडल ने शराबबंदी को जायज ठहराते हुए कहा कि “शराब किसी के लिए भी नुकसानदेह है. उन्होंने दावा किया कि लोग शराब पर प्रतिबंध लगाने से खुश हैं और यह हमेशा के लिए रहने वाला है”.