बेरोजगार डेन्टिस्टों के समर्थन में डीएसएआई के ऑनलाइन कंपेन में एसीटीएफ का साथ

पिछले वर्ष 5 अगस्त को जम्मू – कश्मीर की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत में जबरजस्त बदलाव आया जिसका परिणाम यह है कि नए परिवेश में वह विकास की अपनी नई इबारत लिखने को तैयार है. हालांकि, समस्याएं भी हैं जिनसे शिक्षित वर्ग परेशान है. इस वर्ग में जम्मू-कश्मीर के डेंटल सर्जन भी हैं जो बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं. इनकी संख्या लगभग 5000 है.

डेंटल सर्जन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (DSAI) अभीतक इस समस्या से अकेले जूझ रहा था. परंतु एन्टी कोरोना टास्क फोर्स (ACTF) का सहयोग मिलने से उसे काफी राहत और ताकत मिली है. ये दोनों संगठन मिलकर अब ऑनलाइन अभियान चला रहे हैं.

इस सिलसिले में एसीटीएफ के कन्वेनर किशन कुमार झा ने एक विज्ञप्ति जारी की है. विज्ञप्ति के मुताबिक डीएसएआई के सचिव डॉ रोबिन मलिक ने Covid -19 महामारी के कारण भारत के निजी क्षेत्र में काम कर रहे दन्त चिकित्सकों को बुरी तरह प्रभावित बताया है.

इस सिलसिले में डीएसएआई ने प्रधानमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, डेंटल कौंसिल ऑफ इंडिया तथा सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को मेल भेजा है. ऑनलाइन पेटिशन भेजना भी शुरू किया गया है जिसमे अभी तक लगभग 8400 डेंटल सर्जनों ने भाग लिया है. इसके अलावा ट्विटर पर भी ‘सेव डेंटिस्ट सेव डेंटिस्ट्री’ कंपेन भी चलाया जा रहा है ताकि निजी क्षेत्र के डेंटल सर्जनों की मौजूदा स्थितियों से सरकार अवगत हो सके.

इस कंपेन के कोऑर्डिनेटर डॉ अखिलेश त्रिपाठी ने बताया कि ऑनलाइन कंपेन , एन्टी कोरोना के कन्वेनर श्री किशन कुमार झा , नेशनल कन्वेनर डॉ सिद्धार्थ गुप्ता , सीनियर मेडिकल एडवाइजर डॉ पीयूष पुष्कर सिंह और चीफ मेडिकल पीआरओ के संयुक्त निर्देशन में यह ऑनलाइन सर्वे चलाया जा रहा है जिसमे प्रतिदिन सैकड़ों डेंटल सर्जन जुड़ रहे हैं.

निजी क्षेत्र के डेंटल सर्जनों की स्थिति पूरे देश भर में खराब है. कोरोना महामारी ने उनकी असुरक्षा को और बढ़ाया ही है. खासकर जम्मू – कश्मीर के 5000 डेंटल सर्जनों के सामने सुरक्षा कारणों से निजी क्लीनिक चलाना बहुत बड़ी चुनौती है.

इतना ही नही , वर्षों से सरकार ने डेंटल सर्जन की वेकेंसी नही निकाली है. इससे न सिर्फ बेरोजगार डेंटल सर्जनों की संख्या बढ़ी है बल्कि उन्हें और उनके परिवार को अनेक जटिल समस्यायों का सामना भी करना पड़ रहा है. आर्थिक स्थिति बदहाल है जिसका असर समाज पर भी पड़ रहा है और आम लोग इसका खामियाजा भुगत रहे हैं.

दिलचस्प यह है कि बेरोजगार युवा डेंटल सर्जनों की आर्थिक बदहाली के बीच झोला छाप चिकित्सकों की बन आयी है. लेकिन इसके बुरे नतीजे भी सामने आ रहे हैं. आम लोगों का आर्थिक दोहन तो हो ही रहा है , अनेक तरह की बीमारियों से भी लोग ग्रस्त हो रहे हैं.

डीएसएआई के सचिव डॉ रोबिन मलिक, डॉ जतिन अनेजा और डॉ शैलेन्द्र तोमर ने जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल से Covid – 19 मेडिकल इमरजेंसी के समय कम-से-कम 6 महीने तक डेंटल सर्जनों को सरकारी सेवा में लगाये जाने की मांग की है. इससे जम्मू- कश्मीर में चिकित्सकों की कमी पूरी होगी.

इसके अतिरिक्त यह मांग भी की गई है कि जम्मू-कश्मीर सहित देशभर में डेंटल सर्जनों की लम्बित वेकेंसी जल्द-से-जल्द निकाली जाय ताकि बेरोजगार डेंटल सर्जनों को रोजगार मिल सके और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आये. इससे न सिर्फ बेरोजगारी में कमी आएगी बल्कि प्रदेश के आम लोगों की डेंटल समस्यायों का उचित समाधान भी निकल सकेगा.

(वरिष्ठ संवाददाता अनुभव सिन्हा की खास रिपोर्ट)

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