वर्दी की रौब में लूटता था अस्मत

बाढ़ (अभिषेक सिन्हा की रिपोर्ट) | कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में घर में बैठे लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं. इस डिप्रेशन के कारण लोग आत्महत्या तक कर रहे हैं या करने की कोशिश कर रहे हैं जिनमें अभिनेता, अभिनेत्री, डॉक्टर, ऑफिसर शामिल हैं.

इसी कड़ी में पटना जिले के बाढ़ की तवायफ़ का भी किस्सा सामने आया है. वैसे आत्महत्या करने गई इस तवायफ़ को लोगों ने बचा लिया परंतु इसकी एक अलग ही कहानी है जो हम फिल्मों में देखते आए है.

तो ये कहानी है बाढ़ के रन्नु टोला निवासी एक तवायफ़ शफ़ीना (काल्पनिक नाम) की जो बाढ़ के रिहाइशी इलाके में नाच गाने से अपने परिवार का गुजर बसर किया करती है. इस कोठे पर भिन्न भिन्न लोग आया करते हैं. इन्हीं लोगों में एक युवक भी आया करता था. उस युवक ने शफ़ीना को शादी करने का झांसा देकर अपने प्यार के जाल में फंसा लिया. युवक ने अपने गले में पहने लॉकेट की कसम खाकर शफ़ीना को शादी का भरोसा भी दिलाया. फिर उसने शफ़ीना से शारीरिक संबंध बनाए.

बेचारी ‘तवायफ’ शफ़ीना भी राकेश की झूठी कसम पर विश्वास कर उसकी ‘पत्नी’ बनने का सपना देखने लगी. लेकिन शादी का झूठा दिलासा देकर शफ़ीना के साथ मौज-मस्ती करने के बाद उस युवक ने जब शफ़ीना को यह कहा कि वो उससे शादी नहीं करेगा तो शफ़ीना का दिल टूट गया.

कथित प्यार में धोखा खाने के बाद शफ़ीना ने आत्महत्या करने का सोच लिया. फिर उसने रविवार दिन में उमानाथ सती स्थान में गंगा नदी में छलांग लगाने नदी के किनारे पहुंची. जब वह गंगा में छलांग लगाने ही वाली थी कि स्थानीय लोगों ने उसे पकड़ लिया.

फिर लोगों ने बाढ़ पुलिस को खबर किया जिसपर पुलिस शफ़ीना को पूछताछ करके स्थानीय थाने ले गई. पूछताछ के दौरान पता चला कि उस धोखेबाज युवक का नाम राकेश कुमार है जो एक कथित पुलिस वाला है तथा फतुहा-दनियामां के जिरई गांव का निवासी है. यह भी पता चला है कि राकेश के पिता भी पुलिस विभाग में ही कार्यरत हैं तथा जहानाबाद में पदस्थापित हैं.

बाढ़ पुलिस ने शफ़ीना से पूछताछ के बाद उसके परिजन को सुपुर्द कर दिया. पुलिस ने इस मामले में कुछ कदम नहीं उठाया क्योंकि यह मामला किसी पत्नी या किसी युवती का नहीं, बल्कि कोठे पर नाचने-गाने वाली लड़की का था. इस आज भी भारतीय समाज में नाचने-गाने वाली लड़की या तवायफ़ के अरमानों का कोई महत्व नहीं है.

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