पंक्षियों के खाने पीने के लिए बनाया जुगाड़

छपरा (TBN रिपोर्टर) | लॉकडाउन की वजह से भले ही मानव ने रोजगार, खाद्य सामिग्री, दैनिक जरूरतों की वस्तुए जैसी बहुत सारी मुसीबतों का सामना किया हो. लेकिन लॉकडाउन के बाद से पर्यावरण संतुलन में सबसे बड़ी सफलता मिली. सरकार के द्वारा पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने के तमाम प्रयासों के बावजूद इतनी शुद्ध हवा और स्वच्छ वातावरण कभी देखने को नहीं मिला जितना इस लॉकडाउन के दौरान देखने को मिला है. इसके फलस्वरूप लम्बे समय के बाद चिड़ियों की चहचहाहट सुनने का मौका भी मिला है. 

गर्मियों के मौसम के चलते जून माह में सूरज की भयंकर गर्मी के कारण ताल तलैया के सूखने से पक्षियों को पानी और खाने की दिक्कत होने लगती है और पक्षियों के बेमौत मरने का सिलसिला भी शुरू हो जाता है. पक्षियों की इस समस्या को देखते हुए छपरा के युवाओं के एक समूह ने इसका एक समाधान निकाला है. उन्होने टीन के डिब्बों से एक जुगाड़ बनाया है.

भारतीय लोगों को जुगाड़ बनाने में महारत हासिल है. ऐसी ही भारतीय जुगाड़ में टीन के डिब्बे की दीवारों को काटकर उन्हें पानी और दाना रखने के लिए स्टैण्ड बना दिया है. एक स्थानीय मिस्त्री के सहयोग से यह जुगाड़ बनवा कर पेड़ो की डालियों पर लटका दिया जाता है ताकि भीषण गर्मी में पक्षियों को प्यास और भूख से बेहाल ना होना पड़े.

महाकाल सेवा समिति के युवा कार्यकर्ताओं अमित कुमार और श्याम कुमार ने बताया कि भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षी पानी और खाना के लिए बेहाल रहते हैं इसलिए उनके लिए भी कुछ होना चाहिए. यह सोचते -सोचते एक आइडिया आया और बाजार से तेल के टीन के डब्बो से जुगाड़ बनवा कर पेड़ो पर लटका दिया गया. अब प्रतिदिन कार्यकर्त्ताओ की जिम्मेवारी होगी कि वह सुबह शाम इन बरतनों में पानी और दाना डालते रहें जब तक मानसून शुरू नही हो जाता है.

इंसानों के द्वारा बेजुबान पंक्षियों के बारे में इस तरह की सोच रखते हुए पंक्षियों के खाने और पीने लिए साधन उपलब्ध कराना सभी के लिए प्रेरणादायक कार्य है. महाकाल सेवा समिति के युवा कार्यकर्ता इस कार्य के लिए प्रशंसा के पात्र हैं.