जनऔषधि दिवस समारोह के द्वारा जनता को किया जागरूक

 मुजफ्फरपुर (संदीप फिरोजाबादी की रिपोर्ट)- प्रधानमंत्री ‪नरेन्द्र मोदी द्वारा 01 जुलाई 2015 को “प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना” की घोषणा की गयी थी. इस योजना में सरकार द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाईयों के ‘जन औषधि स्टोर’ बनाए गए. इन स्टोर पर बाजार मूल्य से कम दामों पर दवाइयां उपलब्ध रहती हैं.

जनऔषधि दिवस के रूप में इस योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोजित कार्यक्रम में राजनीतिक दल के मंत्री, नेताओं के साथ साथ डॉक्टरों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों, गैर-सरकारी संगठनों और लाभार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया.

शनिवार 7  मार्च को जन औषधि दिवस के रूप में मानते हुए सांसद अजय निषाद ने जन औषधि दिवस समारोह में कहा कि “दवा व दारू मनुष्य के जीवन से जुड़ी रही हैं. लेकिन, दोनों की भूमिका अलग-अलग है. दवा हमारी जरूरत है तो शराब हमें सामाजिक, आर्थिक व शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दवाओं की कीमत कम करने के लिए जन औषधि केंद्र खोला. इससे गरीबों व जरूरतमंदों को काफी बचत हो रही हैं. वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शराबबंदी कर समाज को बचाया. गरीब जो कमा रहा उसका उपयोग घर-परिवार चलाने में कर रहा. सांसद ने पीएम व सीएम को बधाई दी. साथ ही आम लोगों से ज्यादा से ज्यादा जन औषधि केंद्र से दवा खरीदने की अपील की”.

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद संजय जायसवाल ने  जन औषधि दिवस समारोह में कहा कि “स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व जिला स्वास्थ्य केंद्र पर जेनरिक दवाओं के उपयोग करने की हिदायत दी है. चिकित्सकों से अपील की कि वे जनहित में ज्यादा से ज्यादा जेनरिक दवाएं लेने की सलाह दें. ताकि, इसका सीधा लाभ गरीब जनता को मिले”.

समारोह में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि “इस केंद्र पर 50 रुपये की दवा मात्र पांच रुपये में मिल रही है. इस तरह से जन औषधि केंद्र के जरिए देशभर में 35 हजार करोड़ की बचत आम लोगों को हो रही है”.

नगर विकास एवं आवास मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा कि “गरीबों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक तरह से आर्थिक सहयोग कर रहे हैं. जन औषधि केंद्र पर काफी कम कीमत में दवाएं मिल रही हैं. जिलावासियों से अपील की है कि वह जन औषधि केंद्र से ही दवा खरीदकर उसका लाभ उठाएं”.

प्रधानमंत्री जन औषधि अभियान की शुरुआत आम जनता में जागरूकता लाने के लिए की गयी थी. इस योजना का मुख्य उद्देश्य जेनेरिक मेडिसिन की गुणवत्ता को जनता को समझाना है जिससे लोग समझ सके कि ब्रांडेड मेडिसिन की तुलना में जेनेरिक मेडिसिन कम मूल्य पर उपलब्ध हैं साथ ही इसकी गुणवत्ता में किसी तरह की कमी नहीं हैं. जेनेरिक दवायें मार्केट में आसानी से प्राप्त की जा सकती हैं.