नीतीश से मुलाकात के बाद मांझी का ऐलान 


 पटना (संदीप फिरोजाबादी की रिपोर्ट) :- बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गलियारों में हलचल का माहौल है. मंगलवार की रात को विपक्षी महागठबंधन के नेता एवं हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके आवास पर मुलाकात की. जिसके बाद से चर्चाओं का बाजार गर्म है. महागठबंधन में समन्वय समिति नहीं बनने से नाराज जीतन राम मांझी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) को धमकी देते हुए कहा है कि “अगर  31 मार्च तक को-अर्डिनेशन कमेटी नहीं बनती है तो राजद के बिना कांग्रेस, हम,वीआइपी और रालोसपा वामदल के साथ मिलकर भविष्य की राजनीति तय करेंगे”.

आगे जीतनराम मांझी ने तेजस्वी पर आरोप लगाते हुए कहा कि “राजद की तरफ से राज्यसभा का टिकट किसे दिया गया, ये सभी जानते हैं. तेजस्वी यादव अपने मन से कोई भी निर्णय ले रहे हैं”. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि “राजद के बर्ताव से लगता है कि वह महागठबंधन के साथ चलने को अब तैयार नहीं है, ऐसे में हमें तो सोचना ही पड़ेगा”.

जीतन राम मांझी ने मुख्यमंत्री से अपनी मुलाकात के बारे में स्पष्ट करते हुए बताया कि ” जिस तरह कि बातें मीडिया में चल रही है वैसा कुछ नहीं है. दरअसल, हमने अपने इलाके में आईटीआई कॉलेज का उद्घाटन करने की मांग की थी जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार कर लिया है. इसके साथ ही जीतन राम मांझी ने तेजस्वी पर चुटकी लेते हुए कहा कि “अगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उद्घाटन नहीं करेंगे तो क्या लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव करेंगे”?

इधर तेजस्वी यादव ने एक प्रेसवार्ता के दौरान जीतन राम मांझी को करारा जवाब देते हुए कहा कि “को-ऑर्डिनेशन कमेटी के बिना ही मांझी जी के बेटे संतोष मांझी को राजद कोटे से एमएलसी बनाया गया है”?

मांझी ने तेजस्वी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, “मैंने महागठबंधन में आने के लिए और टिकट देने के लिए कोई आवेदन नहीं दिया था, बल्कि 50 बार फोन आने के बाद महागठबंधन में शामिल हुआ था। मेरे बेटे को विधानपरिषद का टिकट मिला तो चुनाव में कई सीटों को जिताने में मेरी पार्टी से मदद भी मिली। इस बारे में तेजस्वी जी को कुछ पता नहीं है और इसे लालू जी ही ज्यादा जानते हैं”।

फिलहाल जीतन राम मांझी और नीतीश कुमार की मुलाक़ात के बाद से सभी राजनीतिक दल तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं. ज्ञात हो जीतन राम मांझी को मई 2014 में बिहार की सत्ता की कुर्सी नीतीश कुमार के कारण ही मिली थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में जदयू की बुरी तरह हार हुई थी जिसके बाद नीतीश कुमार ने स्वयं हार की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यंत्री पद त्याग दिया था. दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के रूप में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे कर  दिया था जिससे नाराज़ होकर नीतीश कुमार ने  एनडीए से अपना पुराना नाता तोड दिया था और अपने दम पर चुनाव लड़ा था. जिसमे जदयू को करारी हार का सामना करना पड़ा था. राज्य की 40 लोकसभा सीटों में से जदयू को महज दो सीटों पर ही विजय हासिल हुई थी

 

 

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