Inspiring Science Award 2020 पटना के फुलवारीशरीफ के मुकेश को

पटना (TBN रिपोर्टर) | राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ स्थित इसोपुर गांव के मुकेश कुमार को  वर्ष 2020 का इंस्पायरिंग साइंस अवार्ड जीव विज्ञान में भारत से सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र प्रकाशित करने के लिए प्रदान किया गया है. मुकेश ग्रामीण परिवेश के मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखते हैं. उन्हें यह पुरस्कार  टाटा मूलभूत अनुसन्धान संस्थान मुंबई में सम्पादित उनके पीएचडी शोध के लिए मिला है. 24 जनवरी को एम्स, नई दिल्ली के जवाहरलाल ऑडिटोरियम में नोबेल पुरस्कार विजेता और द रॉयल सोसाइटी, लंदन के अध्यक्ष डॉ. वेंकटरमन रामाकृष्णन ने मुकेश कुमार को  पदक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया.

मुकेश एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं तथा उनके पिता सत्येंद्र प्रसाद  का छड़ी,बालू,ईंट सीमेंट का व्यवसाय है तथा माँ मुंदरी देवी एक गृहिणी हैं. डॉ मुकेश को यह पुरस्कार मिलने से उनके परिजनों और मुहल्ले वालों की ख़ुशी का ठिकाना नहीं है. डॉ मुकेश की पत्नी पत्नी अंजलि इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी कानपूर में कैंसर पर शोध कर रही हैं, जिनके भी कई शोधपत्र अन्तराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं. गाँव के प्राथमिक विद्यालय से हिंदी मीडियम में शुरुआती शिक्षा हासिल करने वाले डॉ. मुकेश कुमार ने इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी खड़गपुर से परास्नातक की डिग्री हासिल की है और देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक टीआईएफआर मुंबई में शोधकार्य संपन्न किया है.

 

बुधवार को ईसापुर स्थित अपने घर पर मीडिया से बात करते हुए डॉ मुकेश ने बताया कि जिस कार्यक्रम में उन्हें पुरस्कार दिया गया वहां भारत सरकार के वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजयराघवन, एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया सहित लगभग पंद्रह सौ दर्शक मौजूद थे. डॉ. कुमार के अनुसार हाल ही में 8 दिसंबर  2019 को वाशिंगटन डीसी, अमेरिका में आयोजित अमेरिकन सोसायटी फॉर सेल बायोलॉजिस्ट सम्मेलन सहित कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत कर चुके हैं. उनके इस शोध को दुनिया भर में सराहा जा रहा है.

डॉ मुकेश ने मनुष्य के शरीर में वर्तमान  एक ऐसे तंत्र की खोज की है जो यकृत द्वारा रक्त में वसा स्राव को नियंत्रित करता  है. मोटापा और डायबिटीज जैसी कई बीमारियां यकृत और रक्त में अधिक वसा के कारण होती है. इस तंत्र के ख़राब होने की वजह से इन बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. उनकी इस खोज से पता चला है कि एक आणविक मोटर, जिसे कीनेसिन के नाम से जाना जाता है,  यकृत में वसा का परिवहन करती है तथा रक्त में इसके स्राव को भी नियंत्रित करती है. यकृत में इस आणविक मोटर के कम हो जाने से रक्त में वसा का स्रावकम हो जाता है, जिससे कई बीमारियां हो सकती हैं. उन्होंने अपनी प्रयोगशाला में एक ऐसे पेप्टाइड (छोटे प्रोटीन) को भी संश्लेषित किया है जिसका उपयोग रक्त में वसा के स्राव को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है. इस पेप्टाइड का उपयोग भविष्य में वसा से संबंधित कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जायेगा.